‘जयतु जननी जन्मभूमि भारतम्’ के स्वरों से गूंजा उदयपुर
संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में सुरों के संग साकार हुआ राष्ट्रप्रेम, संस्कृति और मातृभूमि का भावलोक ‘भारतं भवतु भारतम्’ और ‘सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा…’ जैसी प्रस्तुतियों ने बांधा समां उदयपुर, 1 सितंबर। कहीं मातृभूमि के लिए समर्पण का स्वर था, कहीं भारत की गौरवशाली संस्कृति का गुणगान और कहीं संस्कृत की मधुरिमा में राष्ट्रभक्ति का उफनता ज्वार। जब नन्हे-नन्हे कंठों से ‘जयतु जननी जन्मभूमि भारतम्’ और ‘भारतं भवतु भारतम्’ जैसे गीत गूंजे तो वातावरण संस्कृत की स्वर-माधुरी और राष्ट्रभावना से सराबोर हो उठा। अवसर था संस्कृतभारती उदयपुर की ओर से संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत मंगलवार…
