भाव निद्रा तोड़ने के लिए स्वयं को स्वयं जानना होगाःविपुलप्रभाश्री
उदयपुर। सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी विपुल प्रभा श्रीजी ने कहा कि भाव से नही सोना है। जिस दिन भाव निद्रा टूट गई उस दिन अपने आप लगेगा कि क्यों अपना समय किसी के साथ व्यर्थ खराब करूं। भाव निद्रा तोड़ने के लिए स्वयं को स्वयं जानना होगा। स्वयं को स्वयं मानना होगा। तीसरा स्वयं के द्वारा स्वयं के दर्शन करने होंगे। बार बार नींद टूटी रही है यानी द्रव्य निद्रा टूट रही है तो जाग जाओ और भावों में आ जाओ। महापुरुषों ने जग छोड़कर जागते को जगाने का प्रयास किया। द्रव्य निद्रा से भाव निद्रा में लाने का…
