उदयपुर, 1 अक्टूबर। राजस्थान विद्यापीठ के संगठन लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गुरुवार को बीएड, बीएड-बाल विकास एवं डीएलएड के नवआगंतुक छात्र-अध्यापकों के लिए स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने राजस्थानी, पंजाबी, गुजराती गरबा, रिमिक्स एवं भक्ति गीतों पर आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणपति वंदना से हुआ। इसके बाद छात्र-अध्यापकों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की विविध संस्कृति के रंगों को मंच पर जीवंत किया। राजस्थानी एवं गुजराती गरबा नृत्य, रामभक्ति आधारित सेमी-क्लासिकल प्रस्तुति, नृत्य, कॉमेडी एक्ट-कम-डांस सहित विभिन्न कार्यक्रमों ने दर्शकों की खूब दाद बटोरी। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में उत्साह, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विशेष रूप से ‘झांसी की रानी’ नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ते है संस्कृति से, मिलता है सुकून – प्रो. मंडोत
मुख्य अतिथि एवं कुलपति प्रो. मंजू मंडोत ने कहा कि स्नेह मिलन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास का प्रयास तभी सार्थक होगा, जब सभी आपसी प्रेम एवं सहयोग के साथ आगे बढ़ते हुए शिक्षक होने के उद्देश्यों को पूरा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हमें अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिससे मन को विशेष सुकून मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास के साथ उनकी प्रतिभाओं को उचित मंच प्रदान करना भी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों को आपसी परिचय एवं संवाद के माध्यम से समन्वय, सहयोग और टीम भावना विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के महत्व और भावी अध्यापक जीवन में उनकी उपयोगिता को भी रेखांकित किया।
पुस्तक का हुआ विमोचन
समारोह के दौरान डॉ. रजनी धाबाई द्वारा लिखित पुस्तक ‘90 के दशक पश्चात राजस्थान में मतदान व्यवहार प्रवृत्तियां’ का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. बलिदान जैन, प्रो. रचना राठौड़, प्रो. भूरालाल श्रीमाली, प्रो. अमी राठौड़, डॉ. सरिता मेनारिया, डॉ. पुनीत पांड्या, डॉ. हरीश मेनारिया, डॉ. अमित दवे, डॉ. अमित बाहेती, डॉ. पल्लव पांडे, डॉ. तिलकेश आमेटा, डॉ. सुभाष पुरोहित, डॉ. रेनू हिंगड़, डॉ. रोमा, डॉ. इंदु आचार्य, डॉ. नीतू व्यास एवं डॉ. शीतल चुग सहित महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।
संचालन डॉ. हरीश चैबीसा एवं रेनू शेखावत ने किया। अंत में प्रो. रचना राठौड़ ने आभार व्यक्त किया।
