पुण्य की नाव में बैठकर हम सिद्ध बुद्ध व मुक्त बन सकते हैं : महासती विजयलक्ष्मी
उदयपुर, 8 अगस्त। श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के तत्वावधान में केशवनगर स्थित नवकार भवन में चातुर्मास कर रही महासती विजयलक्ष्मी जी म.सा. ने शुक्रवार को धर्मसभा में कहा कि साधु का जीवन अनुशासनबद्ध होता है। वह धर्म अनुसार जीवन जीते हैं। जैसे बहता हुआ पानी निर्मल रहता है वैसे ही साधु विचरण करते हुए अपने पर कोई दाग नहीं लगने देते। इस दौरान यदि कोई परीषह आता भी है तो भी वे भावना उच्च रखते हैं। इससे उनके कर्मों की निर्जरा होती है, अन्यथा साधु पुण्यार्जन तो कर ही लेता है। गृहस्थ जीवन में जो एक दूसरे…
