अपने गुरू के प्रति आस्था रखें क्योंकि आस्था में ही रास्ता है: आचार्य विजयराज
उदयपुर, 21 जुलाई। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय चातुर्मास में हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने रविवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि पंचम आरे में गुरू की कृपा ही सबसे बड़ी कृपा होती है। इस संसार में माता-पिता हमारे लौकिक गुरू हैं जो हमें बाल्यकाल से ही संस्कार देते हैं। जो हमें धर्म की प्रेरणा व पावर देते हैं वे अलौकिक गुरू होते हैं। वर्तमान के परिप्रेक्ष्य में जिनकी सोच सकारात्मक, दृष्टि गुणात्मक, शैली समन्वयात्मक, व्यवहार आत्मीयतापूर्ण होता है वे ही हमारे गुरू होते हैं जो हमारे जीवन को शुरू करते हैं। अपने-अपने गुरू के…
