संग्रहालय थीम पर युवा कलाकारों ने उकेरी मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत

उदयपुर, 2 जून। भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के स्थानीय केंद्र उदयपुर में आयोजित संग्रहालय पखवाड़े का समापन मंगलवार को युवा चित्रकारों और छात्र-छात्राओं द्वारा संग्रहालय थीम पर बनाए गए आकर्षक चित्रों के साथ हुआ। इस अवसर पर सुखाड़िया विश्वविद्यालय के दृश्यकला विभाग एवं पेसिफिक यूनिवर्सिटी के चित्रकला विद्यार्थियों के लिए चित्र सृजन शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक डॉ. अश्विन के. दलवी ने किया। उन्होंने कलाकारों की सृजनशीलता, कला के विविध स्वरूपों, उसकी उपयोगिता तथा अध्यात्म से उसके संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे उन्मुक्त होेकर सृजनशील होते हैं तथा कल्पनाओं को साकार करते हैं।
भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के कार्यालय प्रमुख डॉ. निलांजन खटुआ ने बताया कि संग्रहालय की थीम पर युवाओं ने अत्यंत सुंदर और रचनात्मक चित्रों का सृजन किया। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ ने मेवाड़ की समृद्ध चित्रकला परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में आदिमानव द्वारा बनाए गए चित्र आज भी मानव सभ्यता की कहानी कहते हैं। उन्होंने कहा कि गिरवा, चावंड, नाथद्वारा, गिलुंड और देवगढ़ तक मेवाड़ शैली एवं उसकी उपशैलियां विश्वभर में प्रसिद्ध रही हैं तथा सात समंदर पार भी विद्वान मेवाडी चित्र शैली पर चर्चा करते हैं।
डॉ. दीपिका माली ने बताया कि चित्र सृजन शिविर में दिव्या बांगड़, अंजली सुथार, चिराग सालवी, जयेश वैष्णव, अमित रेगर, प्रियंका रलोती, गिरजा तेली, संस्कार पवार, चंदनसिंह बाघेल एवं दिनेश वागरिया सहित कई युवा कलाकारों ने मेवाड़ के मंदिरों, मूर्तियों और संग्रहणीय धरोहरों को कैनवास पर उकेरकर स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम में प्रो. धर्मवीर वशिष्ठ, विभागाध्यक्ष, दृश्यकला विभाग, सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने भी भाग लिया और युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। संचालन सुश्री सुदीपा मण्डल ने किया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!