उदयपुर, 24 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्न विजय जी म.सा. ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि जिन-जिन व्यक्तियों ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया उन्हें परम पद की प्राप्ति हुई है और जिन्होंने नहीं किया वह संसार में भटके। अपनी गलतियों को सुधारने की और स्वीकारने की सुंदरतम व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ जिनशासन में बताई है। दूसरे दर्शनों में भी प्रायश्चित की व्यवस्था तो है परंतु उनकी सद्गति निश्चिंत नहीं है। हमें ऐसे प्रभावशाली जिनशासन की प्राप्ति हुई है फिर भी हम इसे धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं, उनकी आशातना से अटक नहीं पा रहे हैं। इसलिए हमें जगना चाहिए और मिले हुए जिनशासन की जाहोजलाली को आगे बढ़ाने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। अपनी भूलों का इकरार करना चाहिए। चातुर्मास प्रवक्ता राजेश जवेरिया ने बताया कि रविवार की धर्मसभा आराधना भवन मालदास स्ट्रीट में ही होगा, वहीं त्याग-तपस्याओं की लड़ी निरन्तर जारी है।
जिन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार किया उन्हें परम पद की प्राप्ति हुई है : निरागरत्न
