भागवत कथा में गूंजा मोक्ष का दिव्य संदेश
उदयपुर। श्री तैलिक साहू समाज पंच महासभा (छः बैठक) उदयपुर द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन पर्व पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ महोत्सव के दूसरे दिन कथा व्यास परम पूज्य श्री अनंतराम जी शास्त्री ने आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, आत्मकल्याण और मोक्ष का मार्ग बताया।
उन्होंने कहा कि संसार में मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है और यही जन्म मोक्ष प्राप्ति का द्वार खोलता है। भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणभंगुर हैं, जबकि भगवान की भक्ति ही आत्मा को परम शांति और परमात्मा से मिलन का मार्ग प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि “मृत्यु अपना कार्य करने से पहले यदि आत्मा परमात्मा में लीन हो जाए, तो वही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
कथा के दौरान शास्त्रीजी ने भक्त प्रह्लाद के जीवन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि ईश्वर की भक्ति के लिए आयु कोई बाधा नहीं होती। मात्र पांच वर्ष की आयु में भक्त प्रह्लाद ने “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की साधना से भगवान की कृपा प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास से असंभव भी संभव हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के साथ केवल उसके सत्कर्म ही चलते हैं। इसलिए जीवन को धर्म, सेवा, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलाकर सार्थक बनाना चाहिए। उनके प्रेरक उद्बोधन से कथा पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
समाज अध्यक्ष एडवोकेट हेमेन्द्र पण्डियार ने बताया कि कथा आयोजन को लेकर समाज बंधुओं एवं सनातन धर्म प्रेमियों में विशेष उत्साह है तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। महामंत्री कन्हैयालाल नैणावा ने बताया कि व्रत उद्यापन के अंतर्गत ब्राह्मण भोज की रसीदें कथा स्थल पर ही जमा की जा रही हैं।
कोषाध्यक्ष भरत पचलोडिया ने बताया कि समाज के आह्वान पर अनेक भामाशाहों ने इस धार्मिक आयोजन के लिए उदारतापूर्वक सहयोग प्रदान किया है। कथा संयोजक जगदीश पण्डियार ने जानकारी दी कि बुधवार को कथा में शिव-पार्वती विवाह एवं दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
पुरुषोत्तम मास में आयोजित इस कथा महोत्सव में प्रतिदिन भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मकल्याण की प्रेरणा दे रही है।
मृत्यु से पहले आत्मा का परमात्मा से मिलन ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता:अनन्तराम शास्त्री महाराज
