– आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचन की धूम जारी
उदयपुर 02 अक्टूबर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में सोमवार को चातुर्मासिक मांगलिक प्रवचन हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा के सान्निध्य में आदिनाथ प्रथम तीर्थकर भगवान की निर्वाण भूमि श्री अष्टापद तीर्थ की भाव वंदना एवं भावयात्रा करवाई गई। साध्वीजी ने बताया कि करोड़ो साधक अष्टापद तीर्थ पर मोक्ष में गए। शास्त्रों में वर्णन आया है कि अन्य तीथों पर यात्रा करने वाले भविआत्मा उसी भव में ही मोक्ष में जायेंगे ऐसा निश्चित नही बताया गया है परन्तु श्री अष्टापद तीर्थ के लिए स्वयं गणधरों ने अपने अनुभव से बताया कि जो आत्मा अपनी लब्धि के द्वारा श्री अष्टापद तीर्थ की यात्रा करता है वह आत्मा उसी भन में मुक्ति पद को प्राप्त करता है। यहां पर भरतचक्रवर्ती जो प्रथम तीर्थकर आदिनाथ के पुत्र हुए उन्होंने सिंहनिषेधा प्रसाद में जहाँ पर आदिनाथ भगवान के निन्यानवें पुत्रों की, ब्राहमी और सुंदरी की और माता मरुदेवी की रत्न की प्रतिमा भराई है। तीर्थ की रक्षा के लिए सगर चक्रवर्ती के साठ हजार पुत्रों ने बलिदान देकर स्वर्ग में गये। ऐसी महान तीर्थ अष्टापद की भावभरी भाव वंदना, भाव यात्रा श्रावक-श्राविकाओं ने बहुत ही आनंद और उल्लासमय वातावरण के साथ की गई। निचीतप का व्रत भी आज के दिन करवाया गया। चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
अष्टापद तीर्थ की भावयात्रा- भाव वन्दना हर्षोल्लास के साथ मनाया
