उदयपुर जार ने किया वरिष्ठ कलम प्रहरियों का सम्मान, हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे
उदयपुर, 31 मई। पत्रकारिता महज घटना की सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, एक विचार है, एक मंथन है। न्याय, शुचिता, सुराज, सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए पत्रकार की भी उतनी ही भूमिका है जितनी समाजसुधारकों, विचारकों, संतों आदि की होती है। इस दिशा में कार्य करने वाले संत भी उस समय के पत्रकार ही कहे जाएंगे, जब उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को सुधारने के लिए जागरूकता के आंदोलन खड़े किए। और महर्षि दयानंद सरस्वती जैसी महान विभूति भी उस समय की स्थितियों में समाज को जागरूक करने वाले एक पत्रकार कहे जाने…
