उदयपुर। दिनांक 23 जुलाई। स्मृति शेष पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती को आर्य जगत् का भामाशाह कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। ये विचार जनार्दन राय नागर विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एस.एस.सारंगदेवोत ने उदयपुर स्थित नवलखा महल में पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती की पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित समारोह में व्यक्त किए। प्रो.सारंगदेवोत ने कहा कि पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती जो पूर्व में खनन उद्योग जगत् के प्रसिद्ध उद्योगपति थे तथा संन्यास आश्रम ग्रहण करने से पूर्व उनका नाम हनुमान प्रसाद चौधरी था उनकी महर्षि दयानन्द सरस्वती एवं आर्य समाज के प्रति ऐसी गहरी आस्था जगी की उन्होंने अपने सांसारिक जगत् का त्याग कर संन्यास की दीक्षा ग्रहण की।
न्यास अध्यक्ष अशोक आर्य ने कहा कि 1992 से पूर्व नवलखा महल राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग का गोदाम था और पूर्ण जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान एवं आर्य समाज के सतत् प्रयासों के पश्चात् 1992 में राजस्थान सरकार से यह भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में आर्य समाज को प्राप्त हुआ। इसके जीर्णाेद्धार के लिए उस समय स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने एक करोड़ रु. की धनराशि देकर इसका जीर्णाेद्धार करवाया । स्वामी जी श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश के संस्थापक अध्यक्ष थे। आज उन्हीं के द्वारा जो प्रयास किए गए उसके परिणाम स्वरूप न्यास विश्व जगत् में ख्याति प्राप्त कर रहा है।
समारोह के मुख्य वक्ता आर्य जगत् के विद्वान् डॉ. सोमदेव शास्त्री थे उन्होंने इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए कहा कि नवलखा महल वह स्थल है जहां मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा सज्जन सिंह जी के निमंत्रण पर महर्षि दयानन्द सरस्वती आये और लगभग साढ़े छह माह विराजे और यहीं पर अपने अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश का प्रणयन पूर्ण किया। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अपने जीवन काल में लगभग तीस से अधिक ग्रन्थों की रचना की। उनमें से उनका सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश नवलखा महल में लिखा गया। इस दृष्टि से यह आर्य समाज का तीर्थ स्थल है। न्यास के वर्तमान अध्यक्ष अशोक आर्य जी एवं इनकी टीम ने नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के विभिन्न प्रकल्पों को तैयार करवाया इसके लिए ये बधाई के पात्र हैं। मैं इनका साधुवाद प्रकट करता हूं।
इससे पूर्व उदयपुर के प्रसिद्ध उद्यमी एवं समाजसेवी श्री सचिन सर्वा ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आर्य समाज ने स्वतंत्रता आन्दोलन में महती भूमिका निभायी। लाला लाजपतराय, श्याम जी कृष्ण वर्मा जैसे क्रान्तिकारी आर्य समाज से संबंधित थे। देश की स्वतंत्रता आन्दोलन में पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने भी अपनी भूमिका निभायी। स्वतंत्रता आन्दोलन में ये जेल भी गए। अतः इनका नाम आर्य जगत् के साथ साथ स्वतंत्रता सैनानियों की सूची में भी सम्मिलित है। ऐसे महामना से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
आर्य समाज ने नारी शिक्षा, विधवा विवाह, सती प्रथा उन्मूलन, गौ रक्षा आदि क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। वहीं अंधविश्वास में जकड़ी जनता को जाग्रत करने के लिए अंध विश्वास निर्मूलन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए। अतः अंधविश्वास निर्मूलन की सत्यता को प्रायोगिक रूप में प्रकट करने के लिए जादूगर राजतिलक ने विभिन्न करतबों के माध्यम से यह सिद्ध किया कि जादू कोई शक्ति नहीं है बल्कि हाथ की कला है। अतः हमंें अन्ध विश्वासों में नहीं पड़ना चाहिए।
इससे पूर्व समारोह में अतिथियों का स्वागत न्यास मंत्री भवानीदास आर्य ने किया। श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती का जीवन परिचय प्रस्तुत किया और बताया कि स्वामी जी की प्रेरणा से ही हम आज नवलखा महल को विश्व पटल पर प्रमुख स्थान दिलाने में सफल हुए हैं।
इस अवसर पर मेवाड़ की कुंवरानी निवृति कुमारी मेवाड़ ने बताया कि नवलखा महल मेवाड़ राजघराने का अतिथि गृह था और यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि महर्षि दयानन्द सरस्वती तत्कालीन मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह जी के आमंत्रण पर उदयपुर पधारे और राजकीय अतिथि के रूप में नवलखा महल में प्रवास किया। उनकी परम्परा को स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने आगे बढ़ाया और इसी परम्परा को न्यास के वर्तमान अध्यक्ष अशोक जी आर्य आगे बढ़ा रहे हैं।
इस अवसर पर नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र युवा इकाई का शुभारम्भ भी किया गया। इसमें श्रीमती ऋचा पीयूष, मेधा पीयूष, प्रिया अग्रवाल, प्रशान्त अग्रवाल, संध्या मेहरा, सुकृत मेहरा, उषा राठौड़ सृष्टि राठौड़, रवीन्द्र राठौड़, दुष्यान्ता राठौड़, जयेश आर्य, विशाल राठौड़,शीतल गुप्ता, भाग्यश्री शर्मा, आदर्श गर्ग, हेमांग जोशी आदि ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया तथा इसके विकास के लिए कार्य करने का भी संकल्प लिया। नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र युवा इकाई के संयोजन का दायित्व श्रीमती ऋचा पियूष को सौंपा गया।
समारोह का शुभारम्भ यज्ञ इन्द्रप्रकाश यादव एवं श्री नवनीत आर्य के पुरोहित्य में हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा डॉ. सोमदेव शास्त्री थे।
समारोह का संचालन भूपेन्द्र शर्मा ने एवं संयोजन एवं धन्यवाद श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के संयुक्त मंत्री डॉ. अमृतलाल तापड़िया ने किया।
इस अवसर पर आर्य समाज हिरणमगरी,उदयपुर के प्रधान भंवर लाल आर्य,न्यास के कोषाध्यक्ष नारायण लाल मित्तल,जन सम्पर्क सचिव विनोद राठौड़, कार्यालय सचिव भंवरलाल गर्ग,भजनोपदेशक इन्इद्रदेव पीयूष,आर्य समाज, सज्जन नगर के प्रधान हेमांग जोशी, आर्य समाज पिछोली के संरक्षक प्रेमचन्द गुप्त व मंत्री सत्यप्रिय शास्त्री, डॉ.एस.के.माहेश्वरी,गाइड विजय बंसल, न्यास कार्यकर्ता देवीलाल,श्रीमती दुर्गा,रमेश,कपिल तेली एवं उदयपुर की विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधि तथा न्यास के कार्यकर्ता इत्यादि उपस्थित थे।
स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती आर्य जगत् के भामाशाह-एस.एस.सारंगदेवोत
