राजस्थान विद्यापीठ – 87 वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया

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120 बेड वाले हॉस्पीटल का शुभारंभ आगामी माह में
साक्षरता, बेहतर शिक्षा तथा मूल्य बोध को लेकर की विद्यापीठ की स्थापना – प्रो. सारंगदेवोत
पंडित नागर लोकतांत्रिक जनमत के प्रबल पक्षधर – प्रो. सारंगदेवोत

उदयपुर 21 अगस्त/ जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय की मातृ संस्था राजस्थान विद्यापीठ का 87वां संस्था स्थापना दिवस सोमवार को स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर साईंसेंस के सभागार में विद्यापीठ के सभी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में हर्षोल्लास से मनाया गया। समारोह का शुभारंभ कुलाधिपति प्रो. बलवंत राय जॉनी, कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, कुल प्रमुख बी.एल. गुर्जर, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्जवलित एवं संस्था का झण्डारोहण कर किया, इससे पूर्व अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतापनगर परिसर में स्थापित जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापीठ की गौरवमयी यात्रा को बताते हुए कहा कि आज हमारे लिए बहुत ही हर्ष की बात है कि आजादी से पूर्व शिक्षा की बात करना अपराध माना जाता था ऐसी विपरित परिस्थितियों में संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर ने आजादी के दस वर्ष पूर्व 26 वर्ष की उम्र में शिक्षा के माध्यम से देश में आजादी की अलख जगाने के उद्देश्य से 21 अगस्त, 1937 को साक्षरता, बेहतर शिक्षा तथा मूल्य बोध को लेकर एक छोटे से पौधे के  रूप में राजस्थान विद्यापीठ की स्थापना की थी, जो आज वो दस हजार से ज्यादा विधार्थियों, 75 से ज्यादा कोर्सेस, 50 से ज्यादा सर्टिफिकेट कोर्सेस के साथ संस्थान ने वट वृक्ष का रूप ले लिया है। तीन रूपये से शुरू इस संस्थान का वर्तमान में 60 करोड़ का वार्षिक बजट है जो अपने आप में एक कीर्तिमान स्थापित करता है। युवाओं को रोजगार से जोड़ने से उद्देश्य से संस्थान द्वारा मार्बल से निकलने वाली स्लरी से रियायती दर पर टाईल्स का निर्माण कराया जायेगा जिसका पेटेंट भी संस्थान द्वारा कराया जा चुका है जिससे 10 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा।
उन्होंने उन्होंने कहा कि आज विद्यापीठ हर क्षेत्र में आगे है चाहे वो कृषि का क्षेत्र हो, चिकित्सा का क्षेत्र हो। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहॉ संस्थान का कार्य क्षेत्र नहीं हो आने वाले समय में आयुर्वेद के क्षेत्र में भी अपने कदम रखने का जा रहा है। विद्यापीठ शिक्षा के साथ वंचित वर्ग तक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उदद्ेश्य से  इस क्षेत्र में  भी अपनी अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है। इसी कडी में 20 करोड़ की लागत से 120 बेड के हास्ॅपीटल बन कर तैयार हो चुका है जिसका शुभांरभ आगामी दिनोें में किया जायेगा। जहॉ केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा जारी सभी सुविधाओं का लाभ आमजन को मिल सकेगा, साथ ही इसमें इसमें अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर भी बनाया जायेगा। देश के विकास का ये स्वप्न समाज के वंचित और पिछडे़ तबके तक शिक्षा की अलख पहुंचाएं बिना अधूरा है। संस्थापक जन्नूभाई के सपने को पूरा करने और राष्ट्र उन्नित में अपनी भूमिका के दायित्व को पूर्ण करने की दिशा में हम पूर्ण समर्पण से प्रयत्नशील है। प्रतापनगर परिसर में 120 कमरांे का आधुनिक सुविधा से युक्त हास्टल का निर्माण अंतिम चरणो में है जिसका लोकार्पण भी आगामी दिनों में किया जायेगा।
अध्यक्षता करते हुए  कुलाधिपित प्रो. बलवंतराय जॉनी ने कहा कि संस्था ने देश ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त की है यह हमारे लिए गौरव की बात है। उन्होनें कहा कि आज सरकार द्वारा कम्युनिटी बेस व रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बात कर रही है जनुभाई इसी को ध्यान में रखते हुए 86 वर्ष पुर्व ग्रामीण एवं वंचित वर्ग को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडने के उदद्ेश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में कम्युनिटी सेन्टरो की स्थापना की और दिन में काम करने वालो को शिक्षा के जोडने के लिए श्रमजीवी महाविद्यालय की स्थापना की। विद्यापीठ की ओर से करवाए जा रहे शैक्षिक और सामाजिक सहभागिता-सहकारिता कार्यांे की देश की प्रगति में भूमिका को अनुकरणीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि विकास की संभावनाओं पर चिन्तन के साथ साथ उसे मूर्त रूप देने में भी विद्यापीठ अपने दायित्वों को पूर्ण भी करता है। शोधकार्यों की दिशा में विद्यापीठ विवि खास तौर पर सक्रियता से कार्य कर रहा है।
कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि यह दिवस बीतें वर्षों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन तथा नवीन दायित्व बोध का है। नई पीढी से मेवाड के ग्रामीण समुदाय के काम हाथ मे लेते हुए जनुभाई के सपनों केा पूरा करने की बात कही। राष्ट्र की शैक्षिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति में विद्यापीठ अपनी भूमिका को निरंतर सक्रिय बनाए हुए हैं। अच्छे समाज को बनाने की जिम्मेदारी शिक्षक की है। जिसकी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे छात्र निर्माण अपना सर्वस्व दें और समाज के सामने ऐसे छात्रों को उपस्थित कर मिसाल कायम करें।
संचालन डॉ. हीना खान ने किया जबकि आभार पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा ने किया।
समारोह में राजस्थान विद्यापीठ कुल एवं विश्वविद्यालय के सभी युनिटों के डीन, डायरेक्टर एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

By Udaipurviews

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