किंग ऑफ मेवाड़ – महाराणा प्रताप – पुस्तक का हुआ लोकार्पण
साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक थे प्रताप – प्रो. राजेश सिंह
महाराणा प्रताप कुशल प्रबंधक व प्रशासक थे – डॉ. अमितराय
उदयपुर 23 फरवरी / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में गुरूवार को वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप के जीवन पर डॉ. अमित राय जैन द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ किंग ऑफ मेवाड़ – महाराणा प्रताप ’’ का लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रो. राजेश सिंह, कुलपति प्रो.़ एस.एस. सारंगदेवोत, डॉ. सुमिता सिंह, प्रो. जीवन सिंह खरकवाल ने किया। इस अवसर पर प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि प्रताप देश ही नहीं पूरे विश्व में प्रख्यात है , गोरखपुर में महाराणा प्रताप के नाम से कई संस्थाए है साथ ही उनके नाम से फाउण्डेशन भी हैं जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री है। मेवाड़ की आजादी, अस्मिता के लिए प्रताप ने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया। राजवंश के होने के बावजूद वे कभी महलों में नहीं सोये। प्रताप ने कुशल प्रबंधक प्रशासक के तौर पर अपना लौहा मनवाया । मेवाड़ की स्वाधीनता के लिए प्रताप जीवनपर्यन्त संघर्ष करते रहे। राष्ट्रभक्ति में आक्रमकता, धार्मिक क्षेत्र सहिष्णुता तथा सामाजिक क्षेत्र में आत्मसात करने की प्रवृति प्रताप का मूल मंत्र था, इस मंत्र का पालन भारत के सम्पूर्ण क्रांतिकारी आंदोलन में किया गया। व्यक्ति अपने वंश के साथ अपनी त्याग की भावना केा जगाता है, तभी वह गौरवशाली बनता है और प्रताप के व्यक्तित्व में ये विशेषताए नजर आती थी।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो़. सारंगदेवोत ने कहा कि प्रताप ने अपनी आन बान के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे लेकिन अपने आदर्शो, मूल्यों एवं सिद्धांतों से कभी समझौता नहींे किया। प्रताप साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक थे उनकी टीम में हर जाति, वर्ग के लोग थे। मानवीय मुल्यों का जब कभी मूल्यांकन होगा तब प्रताप का कोई स्थान नही ले पायेगा। मेवाड की स्वाधीनता के लिए प्रताप जीवन पर्यन्त संघर्ष करते रहे। प्रताप पर रचित यह पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि पांच सौ वर्षो बाद भी प्रताप आज व्यक्ति के दिलों में बसे हुए है। प्रताप के व्यक्तित्व पर लगभग सभी भाषाओं में मूल्यांकन हो चुका है। फिर भी उनके अनछूहे पहलुओं पर मूल्यांकन की आवश्यकता है।
डॉ. अमित राय जैन ने कहा कि राज्यपाल कलराज मिश्र ने पुस्तक में अपने संदेश में लिखा है कि भारत के युवाओं को प्रताप से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होने कहा कि इस पुस्तक का विमोचन मेवाड की धरा पर होना चाहिए, इसी दिशा में इसका विमोचन विद्यापीठ विश्वविद्यालय में किया गया। प्रताप कुशल प्रबंधक प्रशासक के तौर पर अपना लौहा मनवाया था। मेवाड़ की स्वाधीनता के लिए प्रताप जीवनपर्यन्त संघर्ष करते रहे। राष्ट्रभक्ति में आक्रमकता, धार्मिक क्षेत्र सहिष्णुता तथा सामाजिक क्षेत्र में आत्मसात करने की प्रवृति प्रताप का मूल मंत्र था, इस मंत्र का पालन भारत के सम्पूर्ण क्रांतिकारी आंदोलन में किया गया। व्यक्ति अपने वंश के साथ अपनी त्याग की भावना केा जगाता है, तभी वह गौरवशाली बनता है और प्रताप के व्यक्तित्व में ये विशेषताए नजर आती थी।
प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन प्रो. जीवन सिंह खरकवाल ने किया। संचालन डॉ. हीना खान ने किया जबकि आभार डॉ. रचना राठौड ने दिया। समारोह में डॉ. पारस जैन, छाया जैन, डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. अमी राठौड, डॉ. लालाराम जाट, डॉ. राजन सूद, डॉ.बबीता रसीद, डॉ. नीरू राठौड, डॉ. लीली जैन, डॉ. हीना खान, डॉ. रचना राठौड, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. शिल्पा कंठालिया, डॉ. कुलश्ेाखर व्यास, डॉ. मानसिंह चुण्डावत, डॉ. प्रियंका सोनी, सहित विद्यापीठ के डीन , डायरेक्टर उपस्थित थे।
