मरीजों को टाइप-1 डायबिटीज से उतना खतरा नहीं, जितना खतरा जागरूकता की कमी से है : लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ 

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
देश के विभिन्न प्रदेशों में डायबिटीज मरीजों की मदद करने वाली समाजसेवी संस्थाएं जुटीं
सैयद हबीब
उदयपुर 20 अगस्त. टाइप-1 सहित विभिन्न तरह की डायबिटीज के प्रति जागरूकता फैलाने और आर्थिक रूप से कमज़ोर मरीजों की मदद करने के लिए कार्यशाला रविवार को सिटी पैलेस में हुई। इसमें देश के विभिन्न प्रदेशों में डायबिटीज मरीजों की मदद करने वाली समाजसेवी संस्थाओं को आमंत्रित किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि डायबिटीज पीड़ित मरीजों को टाइप-1 डायबिटीज से उतना खतरा नहीं है, जितना खतरा जागरूकता की कमी से है। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित रोगी चिकित्सकीय परामर्श पर नियमित निर्धारित इंसुलिन लेकर अपनी पूरी जिंदगी सामान्य व्यक्ति की तरह जी सकते हैं। अगर किसी रोगी ने इंसुलिन लेने से पहले ही सोच लिया कि इंसुलिन से पता नहीं क्या होगा, मैं नहीं ले सकता तो फिर चिकित्सक भी क्या कर सकते हैं? टाइप-1 डायबिटीज अमूमन आनुवांशिक होती है और इसका इंसुलिन ही एक मात्र सबसे अच्छा इलाज है। आवश्यकता टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित मरीजों को हौसला देने की है ताकि वे खुद सामान्य जीवन जीने के लिए हमेशा प्रेरित रहें और दूसरों को भी प्रेरित करें। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस पुनीत पहल से जोड़ने के लिए अपने बहिन पद्मजा कुमारी मेवाड़ का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा इस पुनीत पहल में सहयोग करने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। कार्यशाला में कार्यशाला में ऑस्ट्रेलिया से प्रियंका रॉय व रेंजा, दिल्ली से मृदुल व हर्ष कोहली, चेन्नई से प्रशांत मणि, बैंगलुरू से साहिल मदन, हैदराबाद से लक्ष्मीनारायण आदि शामिल हुए। खास बात यह है कि ये सभी लोग अपनी-अपनी समाजसेवी संस्थाओं के जरिए डायबिटीज मरीजों को जागरूक करने और आर्थिक मदद करने का काम पिछले कई सालों से करते आ रहे हैं।
-शारीरिक दक्षता, संतुलित जीवन, शक्कर के सेवन पर संयम, स्ट्रेस फ्री लाइफ के फॉर्मूले से जीवन की जंग जीत सकते हैं
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि टाइप-2 डायबिटीज पीड़ित मरीज दवा और परहेज कर इस बीमारी से ताउम्र मुकाबला कर सकते हैं। मैं अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे बच्चों को समय पर सुलाएं, खेल-कूद गतिविधियां जरूर करवाएं, घर में तैयार किया पौष्टिक अल्पाहार और भोजन कराएं। क्योंकि बिगड़ी जीवनशैली, थमी शारीरिक गतिविधि, बढ़ते तनाव के कारण भी टाइप-2 डायबिटीज के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक भारत में 15 में से 1 व्यक्ति यानी औसत हर तीसरे घर में एक व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है। जबकि टाइप-2 डायबिटीज से शारीरिक दक्षता, संतुलित जीवन, शक्कर के सेवन पर संयम, स्ट्रेस फ्री लाइफ के फॉर्मूले से जीवन की जंग जीत सकते हैं।
By Udaipurviews

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