उदयपुर। देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवसरण में 8 सितंबर को पर्युषण पर्व की आराधना के दौरान डॉ. सुरेंद्र मुनि ने श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर सत्य, अहिंसा, क्षमा और संयम को जीवन का आधार बनाया जा सकता है। इन सिद्धांतों को अपनाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि मनुष्य को मान, माया, लोभ, राग और द्वेष जैसे विकारों का त्याग करना चाहिए। वर्तमान समय में मानव इन विकारों में उलझा हुआ है, जिसके कारण मानवता का पतन हो रहा है। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व आत्मावलोकन और अंतरूकरण की शुद्धि का अवसर है। इस दौरान व्यक्ति अपने भीतर झांककर गलतियों का चिंतन करे और दूसरों के प्रति क्षमा भाव विकसित करे।
उन्होंने कहा कि क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम है। जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और द्वेष को समाप्त करता है, तभी वह सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक प्रगति की ओर बढ़ता है।
साधना के क्रम में प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने पर्युषण पर्व को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पर्व बताते हुए कहा कि इन दिनों में शरीर के मोह-ममता और सांसारिक भावों का परित्याग कर आध्यात्मिक चेतना की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम, तप, क्षमा और आत्मावलोकन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मगलाचारण प्रस्तुत की. समाजसेवी एवं उद्योगपति मांगीलाल लूनावत का श्री संघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन, महामंत्री हिम्मत बड़ाला,दिनेश चौरडिया, रमेश खोखावत, मानसिंह रांका ने अभिनन्दन किया एवं सामूहिक तप, त्याग के प्रत्याख्यान प्रदान किये।
पर्युषण आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का पर्वःडॉ. सुरेंद्र मुनि
