सिंधी समाज में शोक की लहर, श्रद्धांजलि अर्पित की
उदयपुर। सिंधी समाज के परम पूज्य संत शिरोमणि हजूरी रूप साईं साधराम साहेब जी मंगलवार को ब्रह्मलीन हो गए। उनके निधन से संपूर्ण सिंधी समाज एवं देश-विदेश में बसे लाखों श्रद्धालुओं में गहरा शोक व्याप्त है।
पूज्य झूलेलाल सिंधी सेंट्रल पंचायत के निदेशक हरीश राजानी ने बताया कि परम पूज्य साईं साधराम साहेब जी सिंधी समाज के महान आध्यात्मिक गुरु, समाजसेवी एवं मानवता के सच्चे उपासक थे। उनका जन्म 25 अक्टूबर 1963 को सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) के पवित्र तीर्थ स्थल रहरकी साहिब में हुआ था। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में पले-बढ़े साईं साहेब बचपन से ही सेवा, भक्ति और अध्यात्म की ओर अग्रसर रहे।
वे शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत मेधावी थे तथा उन्होंने एलएलबी, एमए एवं बी.कॉम जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की। उज्ज्वल करियर के अनेक अवसर होने के बावजूद उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु के आदेश को सर्वाेपरि मानते हुए सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा और अध्यात्म के मार्ग को समर्पित कर दिया।
साईं साधराम साहेब जी, शाहंशाह सतगुरु स्वामी साईं सतरामदास साहेब एवं संत कंवरराम साहेब की महान आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े हुए थे। उन्होंने देश-विदेश में करोड़ों लोगों को “सेवा, सिमरन और सत्संग” का संदेश दिया तथा प्रेम, भाईचारे, करुणा, सादगी और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाया।
उन्होंने गरीबों, जरूरतमंदों एवं पीड़ित मानवता की सेवा को ही सच्ची भक्ति माना। समाज में शिक्षा, संस्कार, धार्मिक चेतना एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका सरल व्यक्तित्व, मधुर वाणी एवं सेवा भाव लोगों के हृदयों में सदैव जीवित रहेगा।
साईं साहेब के ब्रह्मलीन होने से सिंधी समाज ने एक महान संत, आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं समाज सुधारक को खो दिया है, जिसकी क्षति कभी पूरी नहीं हो सकेगी।
शक्ति नगर स्थित झूलेलाल भवन में प्रताप राय चुग, मुरली राजानी, ओम प्रकाश आहूजा, किशन वाधवानी, उमेश मनवानी, राजेश चुग, कैलाश नेभनानी, किशोर सिधवानी, के साथ कई समाज जनों ने श्रद्धांजलि सभा रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी एवं ईश्वर से प्रार्थना की गई कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके समस्त श्रद्धालुओं एवं परिवारजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
सिंधी समाज के परम पूज्य संत शिरोमणि हजूरी रूप साईं साधराम साहेब जी ब्रह्मलीन
