खांजीपीर को मिनी पाकिस्तान बताने पर विधायक ताराचंद जैन माफी मांगे, इस्तीफा दे—सदर अब्दुल कलीम

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन द्वारा खांजीपीर क्षेत्र को मिनी पाकिस्तान बताने वाली टिप्पणी को लेकर खांजीपीरवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। खांजीपीर सदर अब्दुल कलीम खान ने बिना इतिहास जाने और बिना जानकारी के खांजीपीर के बारे में गलत टिप्पणी करने पर शहर विधायक ताराचंद जैन से माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की है। खांजीपीर क्षेत्रवासियों द्वारा नूरी चौक में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। खांजीपीर सदर अब्दुल कलीम खान ने कहा कि खांजीपीर के इतिहास के बारे में बिना जानकारी के शहर विधायक ताराचंद जैन द्वारा की गई टिप्पणी मुस्लिम समाज के लिए बडी तकलीफदेह है। पूरी कौम को जलील करने वाला वक्तव्य है। शहर विधायक को पता होना चाहिए कि 1861 में तत्कालीन महाराणा शंभूसिंह और उसके बाद महाराणा सज्जनसिंह ने खांजीपीर में इन्फेंट्री तैयार की थी और उसमें मुस्लिम युवाओं को शामिल किया था। 1930 में तत्कालीन महाराणा भूपालसिंह ने मौजूदा खांजीपीर क्षेत्र का नाम भूपालगंज रखा था। 1861 में शंभू पलटन कब्रिस्तान दिया। खांजीपीर में रहने वाले मुस्लिम जवानों ने 1962 में भारत—चीन युद्ध, 1965 में भारत—पाकिस्तान युद्ध और 1971 में बंगला देश को आजाद कराने में हिस्सा लिया। सदर अब्दुल कलीम खान ने कहा कि इन जवानों के परिवार आज भी खांजीपीर में रह रहे है। खांजीपीर उदयपुर का अभिन्न हिस्सा है और यहां के लोग वर्षों से आपसी भाईचारे एवं सामाजिक सौहार्द के साथ रहते आए हैं। किसी पूरे क्षेत्र को इस प्रकार की संज्ञा देना क्षेत्रवासियों की भावनाओं और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि खांजीपीर क्षेत्र ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है, जबकि ताराचंद जैन उदयपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। ऐसे में अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर स्थित खांजीपीर क्षेत्र के संबंध में इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। जनप्रतिनिधियों से समाज में भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। खांजीपीर के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 1939 से 1945 के द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान महाराणा भूपाल सिंह की सज्जन इन्फैंट्री में शामिल होकर क्षेत्र के कई वीरों ने युद्ध में भाग लिया था। इनमें सूबेदार छोटे खान, गुलशेर खान, हमीद खान, आशिक अली, माशूक अली, दिलदार खान, सुल्तान खान, अलीमुद्दीन खान, वजीर खान, अब्दुल रहमान, कप्तान छोटे खान द्वितीय, एहसान खान एवं फकीर अली के नाम प्रमुख रूप से बताए गए। इनके बारे में राजस्थान सैनिक शिक्षक संघ द्वारा लिखी गई पुस्तक को देशभर के सैनिक स्कूलों में पढाया जाता है। खांजीपीर क्षेत्र के अनेक वीर जवान भारतीय सेना का हिस्सा बनकर देश की रक्षा में शामिल रहे और मातृभूमि के लिए अपना योगदान दिया। यह क्षेत्र देशभक्ति, सैनिक सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की गौरवशाली परंपरा रखता है। जिस खांजीपीर क्षेत्र के लोगों ने देश के लिए युद्धों में भाग लेकर अपना योगदान दिया, उस क्षेत्र को मिनी पाकिस्तान कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि हर समाज में कुछ लोग आपराधिक प्रवृति के होते है लेकिन उनके पीछे पूरी कौम को बदनाम करना उचित नहीं है। खांजीपीर में वकील, शिक्षक, इंजीनियर, पुलिस के साथ ही राज्यपाल से सम्मानित बेटियां, राजपत्रित अधिकारी भी रहते है। सदर अब्दुल कलीम खान ने राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष और राज्यपाल से इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने, टिप्पणी की निष्पक्ष जांच करवाने तथा आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने की मांग की। साथ ही शहर विधायक ताराचंद जैन से खांजीपीर क्षेत्र को लेकर कहे गए शब्द वापस लेने, माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की है। साथ ही कहा कि माफी नहीं मांगने पर खांजीपीर कमेटी अगली रणनीति तय करते हुए निर्णय लेगी। सदर अब्दुल कलीम खान ने कहा कि वे महाराणा सज्जनसिंह के वंशज विश्वराजसिंह मेवाड और डॉ लक्ष्यराजसिंह मेवाड को भी  पत्र लिखकर राजमहल में उपलब्ध साक्ष्यों से इतिहास की सत्यता का पता लगाते हुए संज्ञाने लेने का अनुरोध करेंगें। प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट कहा कि खांजीपीर की पहचान देशभक्ति, भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्र के प्रति योगदान से है, किसी विवादित टिप्पणी से नहीं। उन्होंने सभी नागरिकों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की। इस अवसर पर पूर्व पार्षद राशिद खान, फिरोज अहमद शेख, अब्दुल सलाम खान, इशाहक खान, मुस्तफा शेख, कादिर खान, फारूक कुरेशी, मोहम्मद सलीम शेख सहित मोहल्ले के जिम्मेदार नागरिक उपस्थित रहे।
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By Udaipurviews

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