डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा-अन्तःकरण से क्षमायाचना ही आत्मशुद्धि का सच्चा मार्ग
उदयपुर, 15 सितम्बर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में संवत्सरी महापर्व एवं क्षमापर्व श्रद्धा, गरिमा और भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। धर्मसभा में साधु-संतों ने क्षमाधर्म को जीवन में उतारने तथा मन, वचन और काया की शुद्धता के साथ अन्तःकरण से क्षमायाचना करने का आह्वान किया। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता निभाई और एक-दूसरे से वर्षभर की भूलों के लिए ‘मिच्छामी दुक्कड़म्’ कहकर क्षमा मांगी।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि संवत्सरी महापर्व आत्मशुद्धि और जीवन के विकारों को दूर करने का पावन अवसर है। भगवान महावीर ने क्षमाधर्म को मानव जीवन का अनिवार्य अंग बताया है। उन्होंने कहा कि क्षमा केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि प्रतिदिन के आचरण का हिस्सा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रमादवश मन में उत्पन्न वैर-विरोध को समाप्त कर वर्षभर की भूलों के लिए सच्चे हृदय से क्षमा मांगना हमारा परम कर्तव्य है। क्षमारूपी अमृत को आत्मसात करके ही व्यक्ति पापरूपी विष से बच सकता है और भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत को जीवन में उतार सकता है।
प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने पर्युषण एवं संवत्सरी पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवनभर शरीर को स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने के लिए अनेक भौतिक साधन जुटाता है, लेकिन अंततः यह शरीर नश्वर है। इसलिए आत्मशुद्धि, क्षमाभाव और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलना ही जीवन का सच्चा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने संवत्सरी को ‘शुद्ध आत्म पर्व’ बताते हुए आत्मचिंतन और कषायों से मुक्ति की प्रेरणा दी।
गुलाबचंद कटारिया ने दिलाया आत्मचिंतन का संकल्प
समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने संवत्सरी को क्षमा और आत्ममंथन का पर्व बताते हुए कहा कि जिस प्रकार व्यापारी वर्षभर का लेखा-जोखा करता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन की बुराइयों और कमियों का चिंतन कर उन्हें दूर करने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संवत्सरी पर्व हमें प्रतिवर्ष जीवन की कमियों को छोड़कर सन्मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देता है। बचपन में मिले संस्कार जीवनभर पल्लवित होते हैं, इसलिए धर्मनीति, राजनीति अथवा समाजनीति हर क्षेत्र में व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने गुरु पुष्कर के आशीर्वाद का भी स्मरण किया।
सभा में पूर्व महापौर रजनी डांगी, दिनेश चोरड़िया, पुष्पा खोखावत, संतोष मेहता एवं संजय भंडारी सहित गणमान्यजनों ने विचार व्यक्त किए और संवत्सरी महापर्व की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में श्राविका संघ एवं युवा संघ की सहभागिता रही। संघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन, मंत्री हिम्मत बडाला तथा कोषाध्यक्ष दिनेश हिंगड़ ने नवकार कलश, माला, पाट आदि की बोलियां लेने वाले दानदाताओं का आभार व्यक्त किया। मुणोत गोपाल जी एवं अनिल जी पुनमिया परिवार की ओर से समस्त दीर्घ तपस्वी भाई-बहनों का विशेष स्वागत-अभिनंदन किया गया।
संवत्सरी महापर्व पर देवेन्द्र धाम में गूंजा क्षमाधर्म का संदेश
