उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में आयोजित श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहा कि यह दुनिया उसी की है जो यशोगान करती है। जो अपने जीवन में कुछ उपलब्धियां और धर्म ध्यान में विश्वास रखते हैं उसका ज्ञान रखते हैं। हमारे शरीर के इंद्रियों की मालिक हमारी आत्मा है। केवल मनुष्य जीवन पाना ही पर्याप्त नहीं होता है। मनुष्य को अपने मनुष्य होने का एहसास करते हुए जीवन जीने का ढंग भी ज्ञात होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें मनुष्य जीवन मिला है,आत्मा कल्याण करने के लिए और आत्मा के कल्याण का मार्ग णमोकार महामंत्र के जाप एवं धर्म आराधना से ही मिल सकता है। णमोकार महामंत्र की महिमा अनन्त है। महामंत्र के जाप से बिगड़े कार्य भी बन जाते है। जो अपनी आत्मा पर विजय प्राप्त कर लेता है वह इस लोक के साथ ही परलोक में भी सुख की प्राप्ति करता है। हम सम्यक जीवन के साथ ही पुरुषार्थ करेंगे तो हमारा जीवन उन्नत और समृद्ध होगा।
जिस दिन हम हमारी आत्मा पर विजय प्राप्त कर लेंगे उसे दिन हमारा जीवन सफल हो जाएगा और हम इस लोक के साथ हमारे परलोक को भी धन्य कर देंगे। जीवन में कोई भी काम हो उसे कल पर नहीं छोड़ना चाहिए। हमेशा मन में यही भाव उत्पन्न करें कि आज का काम हमें आज ही करना है। चाहे वह धर्म आराधना का हो या धर्म पुरुषार्थ का हो। समय का कोई भरोसा नहीं होता है। जब कल किसी ने देखा ही नहीं तो कल पर भरोसा कैसे किया जा सकता है। इसलिए धर्म पुरुषार्थ जितना भी करें समय पर करें इसी में ही आत्मा का कल्याण है।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि जी ने सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।
मनुष्य अपने होने का अहसास करते हुए जीवन जीयेंः सुकनमुनि
