श्रावण मास में कपिल पालीवाल की ‘सनातनी’ प्रस्तुतियों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर-नाथद्वारा/ श्रावण मास के पावन अवसर पर नाथद्वारा स्थित स्टैच्यू ऑफ बिलीफ (विश्वास स्वरूपम) में आयोजित विशेष आध्यात्मिक एवं संगीत कार्यक्रम में गीतकार, शायर और संगीत निर्देशक कपिल पालीवाल की ‘सनातनी’ प्रस्तुतियों ने मौजूद श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया। भक्ति, संगीत, शायरी और ध्यान के इस अनूठे संगम में कपिल पालीवाल ने भगवान शिव की आराधना से लेकर मानवीय संवेदनाओं तक को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत शिव आराधना की भावपूर्ण रचनाओं से हुई। “जल अग्नि धरा वायू, अंतरिक्ष प्राण आयु… पंच भूत त्वं अहम… त्वमेव केवलम शिवम्…” जैसे शब्दों ने वातावरण को शिवमय बना दिया। इसके बाद “सत्यम शिवम हे सुंदरा, हे त्रिनेत्र धारी दिगंबरा… तुम्हरी शरण अभयंकरा, पाहिमाम शिव शंकरा…” की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। शिव के स्वरूप, शक्ति और भक्त की शरणागति को शब्दों में पिरोती इस रचना पर श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आए।
कपिल पालीवाल ने अपनी प्रस्तुति में शिव के विभिन्न रूपों को भी काव्यात्मक अंदाज में सामने रखा—“तुम शिव तुम ही शक्ति हो, तुम ईश तुम ही भक्ति हो… दया करो विश्वंभरा…”। श्रावण मास की शिवभक्ति के अनुरूप इन पंक्तियों ने कार्यक्रम के आध्यात्मिक वातावरण को और गहरा कर दिया।
उनकी प्रस्तुतियों में केवल आराधना ही नहीं, बल्कि प्रेम, विरह और मानवीय संवेदनाओं के भी अनेक रंग देखने को मिले। “देख… मैं कैसा हूं तुझ बिन…” से शुरू हुई रचना में गणेश के बिना मोदक, कृष्ण के बिना बांसुरी, शिव के बिना जटा-गंगा, राधा के बिना कृष्ण और राम के बिना सिया जैसी उपमाओं के माध्यम से विरह और समर्पण को बेहद संवेदनशील अंदाज में अभिव्यक्त किया गया। “आंखों में हरदम पानी है… बस इतनी सी कहानी है… अंधेरों में हैं सारे दिन…” जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।

कपिल पालीवाल की रचनाओं में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के विविध स्वरूप भी दिखाई दिए। कहीं शिव का रौद्र रूप था तो कहीं श्रीराम और श्रीकृष्ण की छवियां। “कभी मुरली हाथ जमुना के तीर…” और “नयनों में नीर…” जैसे भावों ने भक्ति और काव्य को एक साथ पिरो दिया।

प्रीत के गीत ने किया भावुक

कार्यक्रम का एक भावुक पक्ष मां को समर्पित ‘प्रीत के गीत’ रहा। “वो है नहीं मगर रोज उससे मुलाकात करता हूं… मैं रोज मां की तस्वीर से बात करता हूं…” जैसी पंक्तियों ने श्रद्धालुओं को भीतर तक छू लिया। वहीं “पाजेब बेचकर जब मां लाई बच्चे की किताब… पन्ना कोई पलटूं, मुझे छन-छन की आवाज आती है…” ने मां के त्याग और ममता की मार्मिक तस्वीर सामने रख दी।
कपिल पालीवाल ने गीत, गजल और शेर-ओ-शायरी को सनातनी भावभूमि से जोड़ते हुए अपनी विशिष्ट प्रस्तुति-विधा ‘सनातनी’ के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ साहित्य और संगीत का भी अनुभव कराया। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर सुनते रहे और पूरा वातावरण शिवभक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!