भक्ति ही जीवन के कल्याण का सच्चा मार्ग: पं. मिथिलेश नागर
उदयपुर। माहेश्वरी सेवासदन में माहेश्वरी परिवार की ओर से रविवार से आयोजित नानी बाई को मायरो कथा के प्रथम दिन कथावाचक डॉ. पं. मिथिलेश नागर ने कहा कि यदि भक्ति है तो शक्ति है और भक्ति ही जीवन के कल्याण का सच्चा मार्ग है। उन्होंने कहा कि भगवान की सच्ची आराधना व्यक्ति के जीवन को सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।
तीज का चौक स्थित माहेश्वरी सेवासदन में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान कथावाचक ने भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि नरसी मेहता के जन्म के समय वे बोल नहीं पाते थे।बाल्यकाल में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी दादी ने निकट ही हाटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शंकर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि सात दिन प्रार्थना के उपरांत भगवान महादेव शिवलिंग से प्रकट होकर आशीर्वाद दिया। फिर दादी बालक नरसी मेहता को मंदिर से बाहर लेकर आई और देखा कि वहां वटवृक्ष के नीचे एक दिव्य संत बैठे हैं। वे संत के दर्शन करने वहां गए और सब बात बताई तब संत ने नरसी मेहता के कान में कई बार “राधे-कृष्ण” का उच्चारण किया, जिसके बाद नरसी मेहता बोलने लगे।
कथावाचक पं. नागर ने आगे बताया कि भगवान के दर्शन प्राप्त होने के बाद नरसी मेहता द्वारिका गए और वहां से लौटने पर उनके बड़े भाई बंशीधर ने उन्हें कार्य दिलवाया और एक नागर कन्या से उनका विवाह करा दिया। हालांकि बाद में उन्हें घर से निकाल दिया गया, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में भगवान कृष्ण की भक्ति नहीं छोड़ी।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए। आयोजन स्थल पर भजनों और भगवान कृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
प्रारंभ में और अंत में अनिल पलोड़, अनुज पेड़िवाल, आशीष कोठारी, अशोक काबरा, भगवती लड्ढा, भंवरलाल मूंदड़ा, गोपाल कृष्ण गदिया, दिनेश मूंदड़ा, हेमंत लड्ढा, घनश्याम काबरा, गिरधारी लाल धुप्पड़, गोविंद चेचानी ने सपत्नीक कथावाचक पं. डॉ. मिथिलेश मेहता (नागर) का स्वागत, अभिनंदन एवं आरती की। इस अवसर पर अधिशाषी अभियंता आरयूआईडीपी नाथद्वारा महेंद्र समदानी, यूडीए उपायुक्त रमेश बहेडिया, चित्तौड़गढ़ के समाजसेवी महेश नुवाल का पं. नागर ने सम्मान किया।
इससे पूर्व प्रात: श्री जानकीराय जी मंदिर से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई, जो कथास्थल माहेश्वरी सेवासदन पहुंच कर विसर्जित हुई। कलश यात्रा में महिलाएं सौभाग्य सूचक पीले वस्त्राभूषण से सुसज्जित होकर सिर पर कलश धारण कर, भजन, गीत गाती हुई चल रही थी। शोभायात्रा में करीब 500 लोगों ने शिरकत की।
