डिजिलॉकर – एनएडी/एबीसी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न हुई
उदयपुर 24 मार्च। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना तकनीकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन व जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में डिजिलॉकर – नेशनल अकेडमिक डिपॉज़िटरी / अकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विद्यापीठ के कृषि भवन में संपन्न कार्यशाला ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों ही तरह से एक साथ आयोजित की गई। कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति को उत्तम तरीके से क्रियान्वित करना है। डिजिलॉकर हमारे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को स्टोर करने और एक्सेस करने के तरीके को बदल रहा है। आने वाले वर्षों में यह प्रणाली अकादमिक महत्व के दस्तावेजों को भी स्टोर करेगी। विद्यापीठ भी इस दिशा में प्रयासरत है।
प्रारम्भ में प्रो. आई.जे. माथुर ने स्वागत करते हुए इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने और अपने जीवन को आसान और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म पात्रता मानदंड और धन के संवितरण के त्वरित और निर्बाध सत्यापन की अनुमति देता है, भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करता है और प्रशासनिक बोझ को कम करता है।
डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन की राजस्थान राज्य की समन्वयक स्वर्ण प्रवा स्वैन ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिलॉकर की भूमिका: एनएडी प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। ज़ोनल समन्वयक अभिनव शर्मा ने अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, विद्यार्थियों के एबीसी आईडी निर्माण, क्रेडिट मैपिंग प्रक्रिया और इसके लाभों पर प्रकाश डाला। एनएडी/एबीसी पर तकनीकी सत्र पूनम सिंह द्वारा संपन्न किया गया।
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी ने बताया कि इस कार्यशाला में सम्पूर्ण देश से एक हज़ार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाया, जिनमें विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के नोडल अधिकारी, प्राचार्य, अकादमिक-गैर अकादमिक सदस्य, परीक्षा नियंत्रक व विद्यार्थी थे।
वक्ताओं ने बताया कि डिजीलॉकर एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल है जो हमारे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को स्टोर करने और एक्सेस करने के तरीके को बदल रही है। एनएडी और एबीसी जैसी अन्य सरकारी सेवाओं के साथ इसके एकीकरण ने व्यक्तियों और संस्थानों के लिए इसके मूल्य और लाभों को और बढ़ाया है।
संगोष्ठी में प्रो. जी.के.माथुर, डॉ. सरोज गर्ग, डॉ रचना राठौड़, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. सुनीता मुर्डि़या, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. मंगलश्री दुलावत, डॉ. वीनस व्यास सहित देशभर से आए विशेषज्ञ, प्रतिभागियों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ सिंह राठौड़ ने किया जबकि धन्यवाद डॉ. तरुण श्रीमाली ने व्यक्त किया। तकनीकी सहयोग विकास डांगी ने किया।
