होमवर्क के लिए डांट सकते हैं तो हेलमेट के लिए क्यों नहीं— एसपी

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जिला बाल वाहिनी समन्वय समिति की बैठक में एसपी ने दिए निर्देश
उदयपुर, 5 सितम्बर (पंजाब केसरी): कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को जिला पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने जिला बाल वाहिनी समन्वय समिति की बैठक ली। जिला पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बच्चों के मामले में स्कूल प्रबंधन और अभिभावक आपसी समन्वय से कार्य करते हुए बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। आरटीओ पारीख ने कहा कि बाल वाहिनी गाइडलाइन की पालना सभी विद्यालयों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने चालक-परिचालकों के लिए जल्द ही प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किए जाने की भी बात कही। एएसपी उमेश ओझा ने अवैध व असुरक्षित वाहनों से बच्चों के परिवहन पर अंकुश के लिए अभिभावकों को जागरूक करने का आग्रह किया। साथ ही पुलिस व परिवहन विभाग की ओर से संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे वाहनों पर कार्यवाही किए जाने की बात कही।

बैठक में पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के दुपहिया वाहन चलाने, पावर बाइक्स का इस्तेमाल करने, हेलमेट नहीं पहनने जैसी समस्याओं की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के विरुद्ध सड़क पर कार्यवाही यातायात पुलिस करेगी, लेकिन स्कूलों में विद्यालय संचालक और अध्यापक इन पर नजर रखें। नाबालिग बालक स्कूल में दुपहिया वाहन लेकर आता है तो शिक्षकों की नैतिक ड्यूटी है कि वह उसका लाईसेंस चेक करें, हेलमेट लगाने के लिए समझाएं। होमवर्क नहीं करने पर डांट सकते हैं तो हेलमेट नहीं पहनने पर भी डांट सकते हैं। जिला पुलिस अधीक्षक श्री गोयल ने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनकी लिखित सूचना अभिभावकों को भेजने तथा इसके बावजूद सुधार नहीं होने पर उन बच्चों की सूचना पुलिस को देने का भी आग्रह किया। एसपी ने सभी बाल वाहिनी चालक-परिचालकों की स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच पर बल दिया। आरटीओ नेमीचंद पारीख ने चिकित्सा विभाग को शिक्षा विभाग से समन्वय करते हुए एक सप्ताह के भीतर शिविर लगाकर सभी बाल वाहिनी चालक-परिचालकों का नेत्र जांच कराने की बात कही। इस दौरान पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) नेत्रपाल सिंह, नगर निगम के अधिशाषी अभियंता लखनलाल बैरवा, चिकित्साधिकारी डॉ. प्रणव भावसार, पीडल्ब्यूडी एईएन दिव्या सिंघल सहित शहर के प्रमुख विद्यालयों के संचालक व प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

यह भी दिए निर्देश
-सभी विद्यालयों में 7 दिन के भीतर यातायात संयोजक नियुक्त किए जाएं।
-हर स्कूल में रोड सेफ्टी क्लब गठित करें, इसमें अभिभावकों को भी शामिल करें।
-विद्यालय आने वाले हर बच्चे का परिवहन डाटा तैयार रहे।
-निजी वैन-ऑटो से आने वाले बच्चों का रिकॉर्ड रखते हुए संबंधित वाहन चालकों की भी डिटेल रखें।
-विद्यालय की बाल वाहिनी के चालकों की स्वास्थ्य जांच व पुलिस सत्यापन कराकर परिचय पत्र जारी करें।
-विद्यालय परिसर के साथ ही परिधि में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं।
-विद्यालय परिसर के आसपास होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखते हुए अवांछित कार्यों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

By Udaipurviews

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