सनातन धर्म था,है और रहेगाः महाश्रमण मुनिराज आदित्यसागर
उदयपुर, 11 जुलाई। श्रुतसंवेगी महाश्रमण पूज्य मुनि 108 श्री आदित्यसागर महाराज ससंघ के पावन आगमन से धर्म, अध्यात्म और साधना की अनुपम छटा से इस वर्ष का चातुर्मास आलोकित होने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित भव्य मंगल प्रवेश रविवार, 12 जुलाई 2026 को प्रातः 7ः00 बजे होगा। पूज्य मुनिश्री के साथ मुनि 108 श्री अप्रमितसागर महाराज, मुनि 108 श्री सहजसागर महाराज एवं मुनि 105 श्री श्रेयशसागर महाराज भी ससंघ विराजमान रहेंगे। वर्षायोग के दौरान श्रद्धालुओं को संतों के सान्निध्य में धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, आराधना एवं विविध धार्मिक आयोजनों का लाभ प्राप्त होगा।
वर्षायोग समिति के अध्यक्ष अशोक शाह ने आज धोल की पाटी स्थित आदिनाथ मन्दिर में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि बताया कि मंगल प्रवेश यात्रा सबसिटी सेंटर (आयकर कार्यालय) से प्रातः 7ः00 बजे प्रारंभ होकर कृषि मंडी गेट होते हुए श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, हिरणमगरी सेक्टर-11 पहुँचेगी। इसके पश्चात प्रातः 9ः00 बजे शाही कॉम्प्लेक्स, गवरी चौक, सेक्टर-11 में पूज्य मुनिश्री के मंगल प्रवचन एवं आशीर्वचन का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि 29 जुलाई 2026 को प्रातः 8ः00 बजे गुरु पूर्णिमा महोत्सव तथा दोपहर 1ः30 बजे फतह स्कूल प्रांगण में मंगल कलश स्थापना समारोह का भव्य आयोजित किया जाएगा। इसी के साथ वर्षायोग का विधिवत शुभारंभ होगा। इस दिन करबी 6 हजार श्रावक-श्राविकाओं के भाग लेने की संभावना है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये इन्दौर से श्रावकों से भरी पूरी टेªन उदयपुर आयेगी। वर्षायोग के चारों महीनों में प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, पूजन, अभिषेक, तप, आराधना एवं विविध धार्मिक-अध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनका लाभ श्रद्धालुओं को पूज्य मुनिसंघ के पावन सान्निध्य में प्राप्त होगा।
समाज अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने समस्त समाजजनों एवं धर्मप्रेमी बंधुओं से आग्रह किया है कि वे इन सभी मांगलिक आयोजनों में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म प्रभावना के इस महायज्ञ में सहभागी बनें तथा गुरु भक्ति, धर्म आराधना एवं आत्मकल्याण का पुण्य अर्जित करें।
बहुभाषाविद्, प्रखर चिंतक एवं ओजस्वी वक्ता हैं श्रुतसंवेगी महाश्रमण 108 श्री आदित्यसागर जी महाराज-श्रुतसंवेगी महाश्रमण पूज्य मुनि 108 श्री आदित्यसागर महाराज दिगंबर जैन परंपरा के प्रख्यात संत, बहुभाषाविद्, प्रखर आध्यात्मिक चिंतक एवं ओजस्वी वक्ता हैं। आपका जन्म 24 मई 1986 को मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुआ। एम.बी.ए. की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात आपने सांसारिक जीवन का त्याग कर 8 नवंबर 2011 को सागर (मध्यप्रदेश) में परम पूज्य आचार्य 108 श्री विशुद्धसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की।
मुनिश्री हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत, प्राकृत, कन्नड़, तमिल सहित 16 भाषाओं के विद्वान हैं। आध्यात्मिक प्रबंधन, नीति, गुरु-शिष्य परंपरा एवं आत्मचिंतन जैसे विषयों पर उनके 250 से अधिक ग्रंथ एवं साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित एवं अप्रकाशित हैं। लगभग 50 हजार श्लोकों की रचना कर उन्होंने जैन साहित्य को नई समृद्धि प्रदान की है। अपने गहन अध्ययन, प्रभावशाली प्रवचनों, सरल व्यक्तित्व और प्रेरणादायी जीवनदृष्टि के कारण वे देशभर के श्रद्धालुओं एवं विशेष रूप से युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
इस अवसर पर मुनि आदित्यसागर महाराज ने कहा कि ज्ञान, ध्यान एवं तप में लीन रहने वाला ही साधु होता है। उन्होंने एक प्रश्न के जवाब मंे कहा कि हर धर्म का अपना दर्शन होता है लेकिन सनातन धर्म था, है और रहेगा। भारत में सात लाख बीस हजार गुरूकुल बंद कर दिये गये। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में काफी खामी है। अध्ययन करने वालें बच्चों में 2 प्रतिशत बच्चें आत्महत्या कर रहे है जिसके पीछे मुख्य कारण प्रेम एवं नशा है। 14 से 16 अगस्त तक तीन दिवसीय वृह्द आयोजन होगा जिसमें युवा संस्कार शिविर एवं संगोष्ठी का आयोजन होगा। चातुर्मास के दौरान संस्कार शिविरों का भी आयोजन होंगे। जिसमें भटक रहे बालक-बालिकाओं को सही मार्ग पर लाने हेतु के लिये उपनयन संस्कार शिविर, दम्पत्ति संस्कार शिविर भी शािमल होगे।
इस अवसर पर कमलकान्त जैन,महावीर सिंघवी, भंवर मुण्डलिया,राकेश नागदा,प्रमोद चौधरी,सुरेश वखारिया, सहित अनेक समाजजन मौजूद थे।
मुनि आदित्यागर ससंघ का 12 जुलाई को भव्य मंगल प्रवेश, 29 जुलाई से गुरु पूर्णिमा महोत्सव के साथ वर्षायोग का शुभारंभ
