भगवान महावीर की अहिंसा के सच्चे उपासक थे महात्मा गांधी- सुकुन मुनि
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि जी महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में कहा कि भगवान महावीर की वाणी जीवन का कल्याण करने वाली होती है। जिन्होंने महावीर की वाणी का अनुसरण किया उन्होंने अपने जीवन का उत्थान कर देश दुनिया में महानता को प्राप्त किया।
महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर धर्म सभा में सुकनमुुनि ने उपस्थित श्रावक श्राविकाओं से कहा कि महात्मा गांधी भगवान महावीर की वाणी एवं उनके अहिंसा के सिद्धांत के सच्चे उपासक थे। उन्होंने अपने जीवन में अहिंसा को धारण किया और देश दुनिया को अहिंसा का मार्ग बताया। भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्धांत के आधार पर गांधी जी उसी मार्ग पर चले और अहिंसा के बलबूते पर उन्होंने हमारे भारत देश को आजाद कराया। अहिंसा के मार्ग के आगे अंग्रेजों को आखिरकार झुकना पड़ा और हमारे देश को आजादी मिली। दुबले पतले शरीर वाले महात्मा गांधी अहिंसा के मार्ग पर चलते रहे लेकिन अहिंसा की उनमें इतनी शक्ति थी कि कोई उन्हें छू भी नहीं पाया। उन्होंने अपने अहिंसा के मार्ग पर चलकर अंग्रेजों को झुकने पर मजबूर कर दिया। गांधी जी के इसी अहिंसा के मार्ग के कारण हमारा देश भारत आजाद हुआ। इसी अहिंसा के कारण महात्मा गांधी राष्ट्रपिता बन पाए। अगर जीवन में अहिंसा के भाव स्थापित हो जाए तो आप भी अपने जीवन का उत्थान कर महानता को प्राप्त कर सकते है।
उप प्रवर्तक अमृत मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले निंदक और दूसरे चापलूस प्रवृत्ति के। इन दोनों ही प्रवृत्तियों के लोग स्वयं का तो नुकसान करते ही है वह समाज के लिए भी नुकसानदेय साबित होते हैं। किसी भी जानवर के काटने का इलाज और उपाय तो सब जगह मिल जाता है लेकिन ऐसे लोगों के काटने के बाद उसका उपाय इलाज मिलना मुश्किल होता है। इसलिए जीवन का कल्याण और उत्थान करना है तो जीवन में कभी चापलूसी और निंदा को नहीं अपनाएं। अपने जीवन को सुखी बना कर रखना है तो नींदक को और चापलूस लोगों से हमेशा दूरी बनाए रखें और जीवन में अहिंसा का भाव धारण करें।
डॉ.वरुण मुनि ने धर्म सभा में भगवान महावीर के साधना कल का विस्तार से वृतांत सुनाते हुए उनके 11 वे चौमासे की चर्चा की। उन्होंने कहां कि भगवान महावीर को अपने साधनाकाल में कई संकट और कठिनाइयों को सामना करना पड़ा लेकिन उनकी दृढ़ता और समता भाव के आगे विघ्न और कठिनाइयां उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। जो अपनी साधना में दृढ होता है, संकल्पित होता है वह जीवन में महावीरमयी बन पाता है। मुनिश्री ने महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर उन्हें याद करते हुए कहा कि गांधी जी ने महावीर के सिद्धांत अहिंसा के मार्ग को अपनाया तभी वह जीवन में महान बन पाए और हमारे भारत देश को आजादी मिल पाई।
धर्म सभा का संचालन करते हुए महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास कल में धर्म आराधना निरंतर जारी है। सोमवार को भी देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रावक-श्राविकाओ का धर्म सभा में बहुमत किया गया।
सुकन मुनि जी महाराज के सानिध्य में पंचायती नोहरे में मनाई गांधी जयंती
