पिछले आठ महीने से था दान पात्र खुलने का इंतजार
उदयपुर। गुर्जर समाज के आराध्य भीलवाड़ा जिले के मालासोरी डूंगरी मंदिर का दानपात्र आठ महीने के इंतजार के बाद सोमवार को खोला गया। सबकी निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डाले गए लिफाफे में निकली राशि को लेकर थी। पीएम मोदी के लिफाफे से 21 रुपए निकले, जिसे सोमवार को सार्वजनिक कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के लिफाफे से 21 रुपए निकलने के बाद सभी हैरान हो गए। माना जारहा था कि इस लिफाफे में भीलवाड़ा के लिए बड़ी सौगात या पीएम की ओर से लिखा कोई विशेष संदेश हो सकता है।
28 जनवरी को मालासेरी आए थे पीएम मोदी
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी साल 28 जनवरी को मालासेरी डूंगरी आए थे। उस समय उम्मीद लगाई जा रही थी कि पीएम मोदी उज्जैन की तर्ज पर देवनारायण लोक कॉरिडोर की घोषणा करेंगे, किन्तु उन्होंने कोई घोषणा नहीं की। इसके बाद पीएम मोदी का एक फोटो सामने आया था। जिसमें वह मालासेरी डूंगरी मंदिर के दानपात्र में एक लिफाफा डालते नजर आ रहे थे।
सदस्यों ने सभी के सामने खोला लिफाफा
पीएम मोदी के लिफाफे को लेकर सभी उत्साहित थे। काफी संख्या में लोग भी इसे देखने के लिए मालासेरी डूंगरी मंदिर आए थे। मंदिर के पुजारी हेमराज पोरवाल ने इस लिफाफे को सभी के सामने खोला। लिफाफे में 20 रुपए का एक नोट व एक रुपए का सिक्का निकला।
दान पात्र से निकले तीन लिफाफे
पुजारी हेमराज पोसवाल ने बताया कि दान पात्र से कुल तीन लिफाफे निकले है। इसमें से एक लिफाफे से 2100, दूसरे लिफाफे से 101 रुपए निकले थे। यह दोनों लिफाफे रंगीन थे। पीएम मोदी ने दान पात्र में सफेद रंग का लिफाफा डाला था। वह वीडियो में नजर आ रहा था। जिसमें 21 रुपए निकले हैं।
देवनारायण भगवान की जन्म स्थली है मालासेरी
मालासेरी डूंगरी आसींद उपखंड से 5 किलोमीटर दूर है। बताया जाता है कि 1111 साल पहले भगवान देवनारायण की माता साडू ने यहां पर तपस्या की थी। इससे खुश होकर भगवान विष्णु ने स्वयं संवत 968 माघ माह की सप्तमी को जन्म दिया था। भगवान देवनारायण का जन्म मालासेरी डूंगरी की सबसे ऊपरी चोटी पर जमीन फटकर अंदर से निकले कमल के फूल की नाभि में हुआ था। इसीलिए यह मंदिर गुर्जर समाज का एकमात्र आस्था का स्थल है। राजस्थान के लोक देवता और गुर्जर समाज के आराध्य भगवान देवनारायण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु से प्राप्त शक्तियों का उपयोग देवनारायण ने लोगों की भलाई के लिए किया। यही वजह है कि लोग उन्हें भगवान मानकर पूजते हैं। आठवीं शताब्दी में उन्होंने अजमेर में शासन किया था। भगवान देवनारायण और उनके पिता राजा सवाई भोज के जीवन की कहानी देवनारायण की फड़ नाम के ग्रंथ में लिखी गई है जो बहुत लोकप्रिय है।
गुर्जर समाज के आराध्य मालासेरी डूंगरी मंदिर का खुला दानपात्र, पीएम मोदी के लिफाफे से निकले 21 रुपए
