“बीज नहीं, उम्मीदें बोईं : सीड बॉल थ्रॉ में उमड़ा पर्यावरण प्रेम”
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ की धरती पर रविवार को प्रकृति के लिए एक नई पहल ने जन्म लिया, जब भारत विकास परिषद द्वारा वन विभाग की नर्सरी में आयोजित सीड बॉल थ्रॉ कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग ने मिलकर हरियाली का संकल्प लिया। इस आयोजन में प्रतिभागियों ने हजारों सीड बॉल्स प्राकृतिक भू-भागों पर फेंक कर न केवल बीज बोए, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक हराभरा संदेश भी रोपित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपवन संरक्षक हरिकिशन सारस्वत ने कहा कि भारत का विकास तभी संभव है जब वन सुरक्षित और समृद्ध हों। यह चिंता का विषय है कि जिन वृक्षों से हमें जीवन मिलता है, उन्हें हम कुछ ही मिनटों में काट डालते हैं। पेड़ बनने में बीस वर्ष लगते हैं, पर उन्हें नष्ट करने में केवल बीस मिनट इस मानसिकता में बदलाव अत्यावश्यक है।
सारस्वत ने प्रतापगढ़ जिले में वन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने 2,254 हेक्टेयर भूमि में 5 लाख 77 हजार पौधों का रोपण किया है, वहीं 9 लाख 33 हजार पौधों का बीजारोपण भी किया गया है। इसके साथ ही विभाग द्वारा 250 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष जाकिर हुसैन हकीम ने की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं, जब तक समाज स्वयं आगे बढ़कर प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं निभाएगा। परिषद ऐसे आयोजनों के माध्यम से हर वर्ग को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
प्रांतीय महासचिव सुधीर वोरा ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा, “आज सीड बॉल थ्रॉ जैसी नवीन पद्धतियों की आवश्यकता है, क्योंकि यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरल उपाय है, बल्कि समाज को हरियाली से जोड़ने की एक जीवंत प्रक्रिया भी है। हमें यह समझना होगा कि हर बीज, एक वृक्ष का वादा है और हर वृक्ष, एक जीवन का आधार।”
परिषद के पर्यावरण संयोजक राकेश सोनी ने कार्यक्रम की सफलता पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत विकास परिषद समाज में सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना को जीवंत करती है। यह अभियान केवल बीज फेंकने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह उस भावी भारत की नींव है, जो स्वच्छ, स्वस्थ और हराभरा होगा। सीड बॉल थ्रॉ एक छोटा प्रयास है, लेकिन इसकी हरियाली आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगी।
इस अवसर पर परिषद की पूर्व अध्यक्षा रेखा वोरा, सुधीर हड़प्पावत, अनिल करणपुरिया, पराग घीया, महेश व्यास, अखिलेश कुमार, राजेंद्र बाहेती, शशि बाहेती, रितेश बाहेती, शिखा बाहेती, नीतू चौहान, समाजसेवी अब्बास बुटवाला, विपुल घीया, विशाल गांधी, अल्पेश, सम्यक जैन, प्रवीण शर्मा सहित वन विभाग का तकनीकी स्टाफ भी उपस्थित रहा। सभी ने मिलकर वन क्षेत्र की ओर प्रस्थान कर सीड बॉल्स का वितरण किया।
परिषद के अध्यक्ष जाकिर हुसैन हकीम ने बताया कि सीड बॉल्स में नीम, पीपल, बरगद, शीशम, बबूल, इमली, आंवला जैसे स्थानीय देशी प्रजातियों के बीजों को गोबर, काली मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से तैयार किया गया, जिससे अंकुरण की संभावना अधिक रहती है। इन्हें प्रतापगढ़ शहर से सटे पहाड़ी व बंजर इलाकों में बड़े उत्साह के साथ फेंका गया।
आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज और शासन हाथ में हाथ मिलाकर चलें, तो हर उजाड़ भूमि भी फिर से हरी-भरी हो सकती है। वास्तव में, जहां गिरे बीज, वहां खिले भविष्य यही संदेश लेकर लौटा यह प्रेरक आयोजन।
