बालाजी तरणताल में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का समापन, सीपीआर, स्कूबा डाइविंग एवं ड्राई रेस्क्यू तकनीकों का हुआ लाइव प्रदर्शन
उदयपुर। जिला प्रशासन के तत्वावधान में एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर दीपेंद्र सिंह राठौड़ की पहल पर मानसून सत्र को देखते हुए बालाजी तरणताल पर आयोजित एसडीआरएफ के 60 जवानों का 10 दिवसीय निःशुल्क तैराकी एवं जल से बचाव प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में जवानों ने आधुनिक जल से बचाव तकनीकों, सीपीआर एवं आपदा प्रबंधन कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन कर प्रशिक्षण के दौरान अर्जित दक्षता का परिचय दिया।
समारोह में डॉ. लतिका पालीवाल (भू-अभिलेख अधिकारी), उमाशंकर नागदा (पूर्व कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय), महेंद्र सिंह चुण्डावत (कंपनी कमांडर, एसडीआरएफ), डॉ नीलम भंडारी (प्रधानाचार्य), दुर्गेश शर्मा, अरविंद सिंह राव एवं सुंदर लाल जैन पवन कुमार सुखवाल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। अतिथियों ने जवानों द्वारा प्रस्तुत जल से बचाव एवं आपदा प्रबंधन तकनीकों की सराहना करते हुए इसे जनहित में अत्यंत उपयोगी पहल बताया।
बालाजी तरणताल की डायरेक्टर डॉ. ऋषिका सुखवाल ने बताया कि उदयपुर झीलों की नगरी होने के कारण मानसून के दौरान जल दुर्घटनाओं की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में प्रशिक्षित बचाव दलों की उपलब्धता जन सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं एसडीआरएफ के सहयोग से यह विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ उदयपुर द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुरूप मानसून पूर्व आपदा तैयारी को मजबूत बनाने के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। दस दिनों तक चले प्रशिक्षण में जवानों को तैराकी, जल सुरक्षा, स्कूबा डाइविंग, रेस्क्यू ऑपरेशन, आपदा प्रबंधन एवं आधुनिक बचाव तकनीकों का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शिविर के दौरान बालाजी तरणताल द्वारा सभी प्रशिक्षण सुविधाएं एवं संसाधन निःशुल्क उपलब्ध कराए गए।
समापन समारोह का मुख्य आकर्षण आधुनिक रिमोट कंट्रोल लाइफ बॉय का प्रदर्शन रहा। उदयपुर में पहली बार इस अत्याधुनिक जल बचाव उपकरण का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। यह उपकरण दूरस्थ नियंत्रण के माध्यम से पानी में फंसे व्यक्ति तक पहुंचकर उसे सुरक्षित स्थान तक लाने में सहायता करता है। उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों ने इस नवीन तकनीक की सराहना की।
समापन अवसर पर एसडीआरएफ जवानों ने रिमोट कंट्रोल लाइफ बॉय, स्कूबा एवं डीप डाइविंग, चिन टो रेस्क्यू, हेड टो रेस्क्यू, आर्म टो रेस्क्यू जैसी उन्नत जल बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही ड्राई रेस्क्यू तकनीकों के अंतर्गत रस्सी, बम्बू, लाइफ बॉय, बोतल राफ्ट, जेरिकेन एवं लाइफ जैकेट की सहायता से डूबते व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के विभिन्न तरीकों का भी प्रदर्शन किया गया।
जवानों ने सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) एवं प्राथमिक उपचार की तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनट किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में कितने महत्वपूर्ण होते हैं। इसके अलावा जल में खोज एवं बचाव, सामूहिक रेस्क्यू ऑपरेशन तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया संबंधी तकनीकों का भी जीवंत प्रदर्शन किया गया।
कंपनी कमांडर महेंद्र सिंह चुण्डावत ने कहा कि प्रशिक्षण से जवानों की कार्यक्षमता, आत्मविश्वास एवं आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रशिक्षित जवान मानसून के दौरान झीलों, नदियों, बांधों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकेंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले जवानों का सम्मान किया गया तथा सभी ने आपदा की स्थिति में जनसेवा एवं राहत कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया।
