बावलवाडा को पंचायत समिति बनाने को लेकर लम्बे समय से मांग 

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
प्रस्तावित नहीं लेने पर क्षैत्र वासियों में रोष
खेरवाड़ा,लाड़देश के नाम से जाना जाने वाला बावलवाडा को प्रस्तावित पंचायत समिति बनाने को लेकर लम्बे समय से मांग चली आ रही है। मगर बावलवाडा को प्रस्तावित पंचायत समिति में नहीं लिया गया। जिसको लेकर क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में वसुंधरा की भाजपा सरकार में ऋषभदेव को पंचायत समिति बनाई गई। इसके बाद कांग्रेस की गहलोत सरकार में सेमारी व नयागांव को पंचायत समिति बनाई गई। जबकि इससे भी पहले से बावलवाडा को पंचायत समिति बनाने की मांग की जा रही है। क्षेत्रवासियों व सर्वदल के प्रतिनिधियों ने कई बार ज्ञापन भी दिये हैं मगर परिणाम हताशा वाले ही रहे हैं।
   क्षेत्रवासियों का कहना है कि खेरवाडा से नयागांव 12 किलोमीटर होने के बाद भी पंचायत समिति बनाई गई। ऋषभदेव से कल्याणपुर भी 8 किलोमीटर व खेरवाडा से कल्याणपुर 18 किलोमीटर होने के बाद भी पंचायत समिति बनाना प्रस्तावित किया जा रहा है। मगर बावलवाडा खेरवाडा से 22 किलोमीटर दुर होकर, खेरवाड़ा पंचायत समिति का आखिरी गांव ववाई ग्राम पंचायत मगरा खेरवाड़ा से 40 किलोमीटर दूर स्थित है जो क्षेत्रफल की दृष्टि से भी बड़ा है। इसके बावजुद भी बावलवाडा को पंचायत समिति का दर्जा देना प्रस्तावित नहीं किया गया है। बावलवाडा रतलाम-स्वरूपगंज राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र पर स्थित होकर यहां उप तहसील,पुलिस थाना,सार्वजनिक निर्माण विभाग उपखण्ड कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र,सुलई व ठीकवास में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र,बिजली विभाग कार्यालय,पशु उप स्वास्थ्य केन्द्र,सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय,लेम्पस,बैंक,पोस्ट ऑफिस,वन विभाग,शैक्षणिक संस्थान स्थापित हैं।
     क्षैत्र के प्रतिनिधियों जयदीप फडीया,अनिल डोडा ने बताया कि हमारी लम्बे से चल रही मांग को संज्ञान में नहीं लिया जाने से क्षेत्र की जनता में रोष व्याप्त है। लम्बे समय से प्रयासरत होने के बावजुद भी हमें नकारा जा रहा है। कई छोटे क्षेत्र को पंचायत समिति बनाया जाना प्रस्तावित किया गया है पर भौगोलिक दृष्टि से बडे क्षेत्र बावलवाडा को राजनैतिक दृष्टिकोण से नकारा जा रहा है।
   ग्रामीणों ने मांग की है कि बावलवाड़ा को नवीन पंचायत समिति बनाने को प्रस्तावित करे ताकि जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक एवं अन्य कार्यों के लिए 22 से 40 किलोमीटर दुर खेरवाड़ा नहीं जाना पडे।
By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!