पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प और चक्रीय अर्थव्यवस्था जरूरी – प्रो. सारंगदेवोत

विद्यापीठ – दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का हुआ समापन
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पर्यावरणीय चुनौतियों पर हुआ गहन मंथन
प्रतिभागियों का किया सम्मान
पर्यावरणीय बदलाव के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी माध्यम – सीओ डॉ. रामभुज

उदयपुर, 8 अप्रैल। राजस्थान विद्यापीठ के  शिक्षा संकाय लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय एवं  सर्व विद्यालय केलवानी मंडल, काडी (गांधीनगर, गुजरात) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित  एनवायरमेंटल अवेयरनेस फ्रॉम नॉलेज टू एक्शन पर्यावरणीय जागरूकता – ज्ञान से क्रिया तक विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन बुधवार को महाविद्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय सेमीनार में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि विकास के साथ-साथ कई नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव भी तेजी से सामने आ रहे हैं। इन चुनौतियों को कम करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर पहल करने की आवश्यकता है।
उन्होंने देश और मानवता के अस्तित्व की रक्षा के लिए सभी को संकल्प लेकर कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही, अरावली और पर्यावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों व अनुशंसाओं को आमजन तक पहुंचाकर कॉन्फ्रेंस की सार्थकता सिद्ध करने को सभी का दायित्व बताया।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि निरंतर प्रयासों से ही लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है। उन्होंने चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकॉनमी) को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि विकास के लिए स्वार्थ छोड़कर ‘सर्वहिताय’ की भावना अपनानी होगी और प्रकृति के संसाधनों का संयमित उपयोग करना सीखना होगा।

विशिष्ट अतिथि  डॉ. रामभुज सीईओ,मोबियस फाउंडेशन ने कॉन्फ्रेंस की अनुशंसाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वास्तविक परिवर्तन के लिए मजबूत पर्यावरणीय नीति की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण जागरूकता से जुड़े विषयों में शिक्षा एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में कार्य कर सकती है।
उन्होंने मूल्य आधारित शिक्षा और ज्ञान तंत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए राजस्थान में जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। साथ ही, उन्होंने सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण तथा क्रिएटिव एंड कल्चरल इकॉनमी के महत्व को भी रेखांकित किया और बताया कि कई देश इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। रामभुज जी ने कहा कि सभी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए शिक्षा के लक्ष्यों को हासिल करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा ही सतत और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकती है।

विशिष्ट अतिथि कृषि  सलाहकार प्रो. आईजे माथुर ने कहा कि कृषि और प्रदूषण का सीधा संबंध बन गया है तथा रासायनिक उर्वरकों का उपयोग जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कार्बन क्रेडिट के महत्व और बायोचार जैसे उपायों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने स्कूली स्तर से ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संस्कार विकसित करने पर जोर देते हुए पारंपरिक कृषि पद्धतियों से नई पीढ़ी को जोड़ने की बात कही।

प्रारंभ में प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. रचना राठौड ने दो दिवसीय सेमीनार की रिपोर्ट प्रस्तुत की। डॉ. कुसुम यादव, डॉ. हेमेन्द्र सोनी ने सेमीनार के अपने अनुभवों को साझा किया।

अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कड़ी सर्वा विश्वविद्यालय शिक्षा संकाय की डीन प्रो. वीणा पटेल  ने एनवायरमेंटल अवेयरनेस को नॉलेज से एक्शन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को दो प्रमुख टेक्निकल सेशन आयोजित किए गए। इन सत्रों के विषय इस प्रकार रहे:-

डॉ. रामभुज एवं  प्रो. सीमा जालन की उपस्थिति में -द इम्पैक्ट ऑफ करंट जियोपॉलिटिकल रिस्क ऑन द एनवायरमेंट ग्लोबली एंड इट्स हार्मफुल इफेक्ट्स ऑन द वर्ल्ड यानी क्लाइमेट चेंज, ग्रीनहाउस गैसेस, ग्लेशियर्स, ओवरहीटिंग एंड हेल्थ इश्यूज पर 8 शोधपत्रों का वचन किया गया।
कड़ी सर्व विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय की डीन  प्रा.े गीता पटेल  और डॉ. मधु शर्मा की उपस्थिति में ह्यूमन इंटरफेरेंस विथ द एनवायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी अंडर थ्रेटरू कॉजेस एंड सॉल्यूशंस पर दस शोधपत्रों का प्रस्तुतीकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड पर प्रतिभागियों की ओर से किया गया।

इन विषयों पर विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय संकट, क्लाइमेट चेंज, ग्रीनहाउस गैसेस, ग्लेशियर्स के पिघलने, ओवरहीटिंग तथा हेल्थ इश्यूज पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। साथ ही ह्यूमन इंटरफेरेंस के कारण एनवायरमेंट और बायोडायवर्सिटी पर बढ़ते खतरे तथा उनके कॉजेस एंड सॉल्यूशंस पर विस्तार से चर्चा की गई।

ओपन हाउस डिस्कशन में प्रतिभागियों ने रखे सुझाव:-सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित ओपन हाउस डिस्कशन में प्रतिभागियों ने पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं, उनके समाधान एवं सुझावों पर खुलकर अपने विचार साझा किए। इस चर्चा में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

140 से से अधिक पेपरहुए  प्रेजेंटेशन : दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विषय से जुड़े अलग अलग 140 से अधिक पेपर  प्रस्तुत किए गए, जिनमें ऑस्ट्रेलिया ,  अफ्रीका के मोजांबिक, दुबई, सहित केरल, मध्यप्रदेश,गुजरात, पंजाब,राजस्थान के प्रतिभागी शामिल थे। एनवायरमेंटल कंजर्वेशन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, वॉटर मैनेजमेंट, बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन एवं क्लाइमेट चेंज जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया जबकि आभार डॉ. भविक शाह ने जताया।

इस मौके पर प्रो. वीणा पटेल,  डॉ.  मधु शर्मा, प्रोे. रचना राठौड, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. सुनीता मुड़िया, प्रो. बलिदान जैन, प्रो.  बीएल श्रीमाली, डॉ. भाविक शाह, डॉ. अमित बाहेती, डॉ. कैलाश चंद्र चौधरी,  डॉ. कुसुम यादव,  डॉ. मनीषा सक्सेना, डॉ. पुनीत पंड्या, डॉ. जगदीश पटेल, डॉ. सरिता मेनारिया, डॉ. हरीश मेनारिया, डॉ. अमित दवे  डॉ. पल्लव पांडे, डॉ. तिलकेश आमेटा, डॉ. हिम्मत सिंह, डॉ. रेनू हिंगण , डॉ. इंदु आचार्य  सहित शिक्षाविद् एवं स्कोलर्स उपस्थित थे।  आदि की उपस्थिति रही।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!