वासनाओं का त्याग कर आत्मस्वरूप में लीन होना ही उत्तम ब्रह्मचर्य
उदयपुर। सकल दिगंबर जैन समाज सेक्टर-14 की ओर से महावीर भवन में आयोजित दस दिवसीय पर्युषण पर्व का समापन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक हुआ। अंतिम दिन प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शांतिधारा का पुण्यार्जन लॉटरी के माध्यम से गेहरी लाल देवड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। धर्मसभा में पंडित रविकीर्ति ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि ब्रह्म का अर्थ शुद्ध आत्मा और चर्या का अर्थ उसमें लीन होना है। समस्त विषय-वासनाओं का त्याग कर अपने ज्ञायक स्वभाव वाली आत्मा में प्रवृत्त होना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है। उन्होंने कहा…
