चातुर्मास आत्मजागरण का महापर्व, आत्मचिंतन से ही जीवन का होता है सच्चा कल्याण: डॉ. राजेन्द्र मुनि
उदयपुर। देवेन्द्रधाम में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचनमाला के शुभारंभ अवसर पर उपाध्याय रमेश मुनि, डॉ. राजेन्द्र मुनि, डॉ. सुरेन्द्र मुनि एवं दीपेश मुनि ने चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण का संदेश दिया। डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि चातुर्मास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मजागरण और आत्मचिंतन का महापर्व है। उन्होंने बताया कि पर्व दो प्रकार के होते हैंकृएक लौकिक और दूसरा आध्यात्मिक। लौकिक पर्वों में मनोरंजन, खान-पान, घूमना-फिरना और सामाजिक मेल-मिलाप का महत्व होता है, जबकि आध्यात्मिक पर्व मनुष्य को शरीर से ऊपर उठकर आत्मस्वरूप का चिंतन करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने…
