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नाम मनुष्य है, लेकिन मानवता लापता है

नाम मनुष्य है, लेकिन मानवता लापता है

हत्या, विश्वासघात, दरिंदगी और स्वार्थ की बढ़ती घटनाएँ केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं। ये उस समाज का आईना हैं, जहाँ मनुष्य तो बचा है, लेकिन मनुष्यता कहीं खो गई है। सुबह अख़बार खोलिए। मोबाइल पर न्यूज़ देखिए। शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब कोई खबर आत्मा को झकझोर न दे। कहीं पत्नी अपने पति की हत्या कर देती है। कहीं मंगेतर अपने प्रेमी के साथ मिलकर उस युवक की जान ले लेता है, जिसके साथ जीवन बिताने की कसमें खाई थीं। कहीं दूधमुंही बच्ची दरिंदगी का शिकार बनती है। कहीं बेटा पिता का हत्यारा बन जाता है।…
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नशामुक्त भारत का संकल्पः भारत विकास परिषद ने विद्यार्थियों में जगाई नई चेतना

नशामुक्त भारत का संकल्पः भारत विकास परिषद ने विद्यार्थियों में जगाई नई चेतना

उदयपुर, 3 जुलाई। भारत विकास परिषद, मेवाड़ शाखा उदयपुर द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गौरेला में परिषद के संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश की स्मृति में नशामुक्ति जागृति अभियान, संकल्प एवं सेवा-समर्पण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन अपनाने की शपथ दिलाई गई, मेधावी छात्र-छात्राओं एवं गुरुजनों का सम्मान किया गया तथा विद्यालय को सेवा स्वरूप पंखे भेंट किए गए। शाखा अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि परिषद द्वारा 27 जून से 10 जुलाई तक संस्थापक डॉ. सूरज प्रकाश की जयंती से स्थापना दिवस तक राष्ट्रव्यापी सेवा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला…
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अन्तर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर विशेष

अन्तर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर विशेष

नशे के अंधेरे से निकले नरपत सिंह बने हजारों युवाओं की उम्मीद, 1500 से अधिक लोगों को दिलाई नई जिंदगी नशा एक बीमारी है, अपराध नहीं-आरोग्य सेवा संस्थान के माध्यम से चला रहे जनजागरण और पुनर्वास का अभियान उदयपुर। कभी स्वयं नशे की गिरफ्त में रह चुके समाजसेवी नरपत सिंह चैहान आज हजारों युवाओं और परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। भारत सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के तहत वे अपने आरोग्य सेवा संस्थान के माध्यम से नशे के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन चला रहे हैं। उनकी अथक मेहनत और समर्पण से अब तक 1500 से…
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’आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध’

’आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध’

’हल्दीघाटी युद्ध की 450 वीं वर्षगांठ पर विशेष’) उदयपुर, 16 जून। हमारे यहां इतिहास लेखन में बहुत त्रुटियां हुई है। सच को झुठलाते हुए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है। यह विडम्बना ही है कि आजादी के बाद पाठ्यक्रमों में भी भारत का इतिहास इसी का शिकार रहा। मैं शिक्षक रहा हूं और शोधार्थी भी। इसलिए जब इतिहास की गहराई में गया तो बहुत सी कड़वी सच्चाईयां पता चली। दरबारी इतिहासकारों ने जो लिखा, उसी आधार पर हमारे यहां विद्यालयों में “अकबर महान“ पढ़ाया जाने लगा था। राजस्थान के शिक्षा मंत्री के रूप में जब काम करने का…
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हवा मिले तो वाह, न मिले तो आह

हवा मिले तो वाह, न मिले तो आह

सुबह की पहली किरण के साथ जब कोई हल्की हवा चेहरे को छूती है तो मन अनायास खिल उठता है। तपती दोपहर में अचानक आया ठंडा झोंका राहत बन जाता है और शाम की मंद बयार दिनभर की थकान हर लेती है। हम अक्सर इस सुखद अनुभूति को महसूस तो करते हैं, लेकिन शायद ही कभी सोचते हैं कि हवा हमारे जीवन में कितनी गहराई से बसी हुई है। सच तो यह है कि मनुष्य का पूरा अस्तित्व हवा की डोर से बंधा है। हवा मिले तो वाह, न मिले तो आह। हवा केवल गैसों का मिश्रण नहीं है। यह…
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कारसेवा हेतु मंत्री पद का त्याग और मर्यादित राजनीति के आदर्श—ललित किशोर चतुर्वेदी

कारसेवा हेतु मंत्री पद का त्याग और मर्यादित राजनीति के आदर्श—ललित किशोर चतुर्वेदी

(पुण्यतिथि 5अप्रेल पर विशेष)  डॉ. विजय विप्लवी  राजस्थान की राजनीति में सिद्धांतनिष्ठ,  संगठन-समर्पित, व्यापक जनसम्पर्क व जनाधारित नेताओं की जब भी चर्चा होगी, स्व. ललित किशोर चतुर्वेदी का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाएगा। एक ओर कॉलेज सेवा के दौरान संघ से जुड़ाव के कारण बार-बार स्थानांतरण झेलने के बाद भी कभी वे अपने पथ से विचलित नहीं हुए, वहीं दूसरी ओर राममंदिर कारसेवा के लिए मंत्री पद त्याग कर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि उनके लिए विचारधारा सर्वोपरि थी। आज की राजनीति में जहां परस्पर विवाद, द्वेषपूर्ण प्रतिस्पर्धा, गुटबाजी व व्यवहार में परस्पर असहिष्णुता आम बात है, वहीं…
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होली: रंगों से आगे, सोच का इम्तिहान

होली: रंगों से आगे, सोच का इम्तिहान

होली पर हिंदी विचार लेख | समाज, नैतिकता और जिम्मेदारी होली केवल रंगों का पर्व नहीं होली पर यह हिंदी विचार लेख केवल रंगों और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, सोच और जिम्मेदारी के उस इम्तिहान की बात करता है, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। सवाल यह नहीं है कि हमने कितने रंग उड़ाए, सवाल यह है कि क्या हमने अपने भीतर जमी डर, भ्रष्टाचार, बुरी नियत और अज्ञान की परतों को भी जलाया? होली और होलिका दहन का प्रतीकात्मक अर्थ होली हर साल आती है। गलियाँ गुलाल से भर जाती हैं, चेहरे मुस्कानों से रंग…
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राजपूत महासभा ने किया भाजपा और कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्षों का अभिनंदन

राजपूत महासभा ने किया भाजपा और कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्षों का अभिनंदन

उदयपुर। शहर भाजपा और कांग्रेस संगठन में राजपूत समाज के प्रतिनिधित्व की खुशी रविवार को राजपूत महासभा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन कार्यक्रम रख कर जताई। रावजी का हाटा स्थित नव निर्मित राजपूत भवन में आयोजित हुए इस सम्मान समारोह में शहर भाजपा अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़,शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़,देबारी मंडल अध्यक्ष प्रताप सिंह राठौड़,एडवोकेट सत्येन्द्रसिंह संाखला, का समाज के पदाधिकारियों ने राजपूत महासभा संस्थान के अध्यक्ष सन्त सिंह भाटी के नेतृत्व में मेवाड़ी पगड़ी और अपर्णा ओढ़ाकर अभिनंदन किया। दो विपरीत विचारधाराओं के पदाधिकारीयों को समाज की एक जाजम पर साथ लाने की इस अनूठी पहल का समाज…
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स्वास्थ्य,अनुशासन और सेवा के प्रेरक आदर्श व्यक्तित्व  – राजेन्द्र रांका

स्वास्थ्य,अनुशासन और सेवा के प्रेरक आदर्श व्यक्तित्व  – राजेन्द्र रांका

आर. सी. मेहता, समाज सेवी की कलम से…. आज के दौर में हर कोई अपनी-अपनी जिंदगी की परेशानियों में इतना व्यस्त और उलझा हुआ रहता  है कि उसे यह महसूस ही नहीं होता कि वह अपने स्वास्थ्य के साथ कितनी लापरवाही और खिलवाड़ कर रहा है। श्री रांका सा हमेशा कहते हैं “अगर आप और मैं अपने स्वास्थ्य का ध्यान ही नहीं रखेंगे, तो लाखों-करोड़ों की सम्पत्ति भी बेकार है ” और वो बिल्कुल सही कहते हैं।आज मैं आपको ऐसे ही अद्भुत व्यक्तित्व से मिलवाना चाहता हूँ - श्री राजेन्द्र जी रांका सा, जिनसे गुलाब बाग़ मैं उनके साथ कई…
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पर्यटकों को बुला रही है नाहरगढ़ की मानसूनी रौनक

पर्यटकों को बुला रही है नाहरगढ़ की मानसूनी रौनक

हरियाली की चादर ओढ़े नाहरगढ़ पर फुहारों की बहार मानसून की मेहरबानी ने बढ़ाई नाहरगढ़ की रौनक, सैलानियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी — डॉ. कमलेश शर्मा जयपुर। मानसून की फुहारों के साथ ही नाहरगढ़ की पहाड़ियाँ एक बार फिर जीवन से सराबोर हो उठी हैं। चारों ओर हरियाली का साम्राज्य है, पेड़-पौधे धुलकर और भी हरे-भरे हो गए हैं और वातावरण में ताजगी घुल चुकी है। इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक नाहरगढ़ की ओर रुख कर रहे हैं। गत सप्ताहभर में जब-जब वर्षा हुई, उसके तुरंत बाद हजारों सैलानी नाहरगढ़ पहुंचे। खासकर…
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