हिंदू संस्कृति सभ्यता में प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना नहीं: हर्षवर्धन त्रिपाठी

उभरते भारत की सटीक तस्वीर दिखाना भी पत्रकारिता धर्म : हर्षवर्धन त्रिपाठी
विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का बेहतर मॉडल है भारत : हर्षवर्धन त्रिपाठी
विश्व संवाद केंद्र चित्तौड़ प्रांत की ओर से प्रांत स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह संपन्न
5 श्रेणी में पत्रकारों का हुआ सम्मान

उदयपुर 03/05/2026 । विश्व संवाद केंद्र समिति उदयपुर, चित्तौड़ प्रांत द्वारा रविवार ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया को देवर्षि नारद जयंती व पत्रकार सम्मान समारोह का अयोजन सुखाड़िया विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में हुआ। समारोह में मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी, मुख्य अतिथि महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के कुलगुरू प्रो सुरेश अग्रवाल एवं विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख डॉ महावीर कुमावत रहे। अध्यक्षता विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला ने की।

मुख्य वक्ता  हर्षवर्धन त्रिपाठी ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राजा इंद्र के दरबार में उपस्थित होने का प्रसंग किसी शास्त्र में नहीं मिलता और ना उन्होंने कभी स्वयं की प्रशंसा की।  पत्रकार को कभी दरबारी नहीं होना चाहिए।  पत्रकार का निर्माण ही धर्म संस्थापनार्थये हुआ है।  मुख्य वक्ता  हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा कि मुग़ल एवं अंग्रेज सत्ता के बाद स्वतंत्र होकर पंथनिरपेक्ष राष्ट्र बने भारत की धीमी आर्थिक गति को बौद्धिक बेईमानों ने हिन्दू इकोनॉमी नाम दिया। देश ने कोविड महामारी एवं नोटबंदी की सख्ती के बावजूद आर्थिक प्रगति हासिल की है।  आज हमारे देश की जीडीपी 8% से भी ज्यादा है

त्रिपाठी ने कहा कि स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से देश के चारों महानगरों को जोड़ने की योजना धरातल पर उतरी।   हमारा देश का हिंदू चारों दिशाओं के तीर्थ करना चाहता था,  पर उससे पूर्व उसकी आस्था के बारे में नहीं नहीं सोचा गया।  अब हमारे देश में 8 से लगाकर 35 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क बनाई जा रही है।  देश के हर हिस्से में हवाई यात्रा की पंहुच है।  विगत दशक में हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 164 हो गई है। जिन सड़क मार्ग पर 12-15 घंटे लगते थे वहां एक्सप्रेसवे से सफर 5-6 घंटे का रह गया है। रेलवे इंजिन डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक हो रहे है। सोलर में भारत में काफी विकास किया है। लगभग 80 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। समय व् ईंधन बचत से संसाधन की खपत में कमी होकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान हुआ है। हमारे देश की रेलवे ने पिछले 1 वर्ष में 700 करोड लोगों को यात्रा कराई और रेल देरी समय में 96% सुधार हो गया है।  विकास परियोजनाओ के विरुद्ध किये जारी आंदोलन के पीछे निहित दूसरे पहलू को भी पत्रकारों को देखना चाहिए। यह भी चर्चा भी हम पत्रकारों को ही जनता तक पंहुचानी चाहिए।

मुख्य वक्ता ने कहा कि आम लोगों के जीवन को बेहतर करने वाले आज हमारे देश में वंदे भारत ट्रेन दौड़ रही है। भारत में बड़ी संख्या में आईआईटी, आईआईएम और मेडिकल कॉलेज खुले हैं, जो हमारे विकास की राह को दिखाता है। पहले एक वर्ष में 40000 एमबीबीएस पास करते थे, आज प्रतिवर्ष हमारे देश में 88000 डॉक्टर बनते हैं।  हमारे देश में प्रति व्यक्ति मेडिकल खर्च ₹600 का मापन मापा जाता है, जबकि लंदन, फ्रांस और दूसरे विकसित देशों में देखा जाए तो प्रति व्यक्ति मेडिकल खर्च ₹10000 सरकार करती है।

मुख्य वक्ता ने कहा कि हमारा देश सनातन देश है शुरू से ही प्राकृतिक पूजा कर रहा है। हमारे देश के लोगों का मन नदी, पेड़-पौधे यथा बरगद सहित प्रकृति के सभी अंग को साथ में रखता है। उनके बिना सनातन समाज का जीवन ही नहीं चलता।  हिंदू संस्कृति सभ्यता में प्रकृति के बिना जीवन ही कल्पना नहीं है और प्रकृति को खराब करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

मुख्य अतिथि एमडीएस विश्वविद्यालय के कुलगुरू सुरेश अग्रवाल ने कहा कि एक प्रसंग में नारद जी ने बड़े ऋषि दुर्वासा को भी बेबाक रूप से खरी बात बोल दी थी।वर्तमान में भी पत्रकार को इसी प्रकार से बेबाक होकर अपनी राय रखनी चाहिए।

विशिष्ट अतिथि डॉ महावीर प्रसाद कुमावत ने कहा कि भाषा, जाति, अर्थ और क्षेत्र के विषमताओं को दूर करना संघ लक्ष्य है, तभी श्रेष्ठ भारत बन सकता है और तभी हम विश्व गुरु बन सकते हैं।

कार्यक्रम की प्रस्तावना विश्व संवाद केंद्र के सचिव प्रवीण कोटिया ने प्रस्तुत की। पत्रकार मनीष मेघवाल ने श्रेणीवार सम्मानित होने वाले पत्रकारों का परिचय करवाया। संचालन भानुप्रिया और धन्यवाद अध्यक्ष कमल प्रकाश ने ज्ञापित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, भारत माता व देवर्षि नारद के चित्र के समक्ष अतिथियों द्वारा दी प्रज्वलन किया। छात्रा मुमूक्षा भावसार ने शारदे माँ वंदना पर एकल नृत्य प्रस्तुत किया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत वन्देमातरम व अंत में राष्ट्रगान का गायन हुआ।

विशेष आकर्षण बिंदु –
5 श्रेणी में उत्कृष्ट पत्रकार को देवर्षि नारद सम्मान –
चित्तौड़ प्रांत के पत्रकारों से 5 श्रेणियों में ऑनलाइन प्रविष्टियां मांगी गई थी। अंतिम तिथि 25 अप्रैल तक प्रांत के 13 जिलों से कुल 132 आवेदन प्राप्त हुए। जिनमें विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत निर्णायक मण्डल द्वारा उत्कृष्ट पत्रकार (प्रिंट) पुरस्कार भूपेश दाधीच दैनिक नवज्योति उदयपुर, उत्कृष्ट पत्रकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पुरस्कार मुकेश हिंगड दैनिक भास्कर डिजिटल एप उदयपुर, उत्कृष्ट छायाकार का पुरस्कार बलराम मेहता राजस्थान पत्रिका बारां, उत्कृष्ट पत्रकार (यूट्यूब चैनल) का पुरस्कार निपुण भार्गव, चैनल निदेशक ‘बात आज की’ अजमेर और उत्कृष्ट स्तंभकार का पुरस्कार भंवर सिंह कछवाहा संपादक बालाजी टाइम्स को प्रदान किया गया। प्रत्येक श्रेणी में चयनित उत्कृष्ट पत्रकार को स्मृति चिन्ह, पुस्तक देवर्षि नारद संचार दर्शन एवं 21-21 हजार की सम्मान राशि प्रदान की गई।

गत वर्षों में अजमेर, भीलवाड़ा व कोटा में हुए चक्रीय आयोजन-
पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन वर्ष 2022 तक उदयपुर में आयोजित होता रहा है। इसके बाद 2023 में अजमेर, 2024 में भीलवाड़ा तथा 2025 मे कोटा में आयोजित हुआ था। वर्ष 2026 का यह आयोजन पुन: उदयपुर केन्द्र पर हुआ है।

साहित्य बिक्री स्टाॅल पर दिखाई पाठकों ने रूचि –
समारोह स्थल पर साहित्य बिक्री के लिए स्टाॅल लगाई गई। जहां वैदिक ज्ञान परंपरा और गुरुवाणी, हिंदुत्व – हिंदू राष्ट्र विकास पथ, तत्वमसि, भारतीय संस्कृति का विश्व संचार, भारत का संविधान, जीवन की उड़ान, जंगल सत्याग्रह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय स्त्री चिंतन और भूमिका, स्वदेशी समाज, डॉक्टर हेडगेवार संघ और स्वतंत्रता संग्राम, हिंदू धर्म संस्कृति समाज राष्ट्र, हिंदू राष्ट्र क्यों सहित विभिन्न विषयो की पुस्तके क्रय की गई।

नारद जयंती वृत्तचित्र का प्रदर्शन –
पत्रकार सम्मान समारोह के दौरान आद्य संवाददाता देवर्षि नारद के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र (डॉक्युमेंट्री) का प्रदर्शन भी किया गया । जिसमें देवर्षि नारद के संचार संबंधित आयामों को विशेष रूप से उल्लेखित किया गया।

संविधान के चित्रों की प्रदर्शनी –
समारोह स्थल पर भारत के संविधान में अंकित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इन चित्रों को संबंधित अध्याय से संबंधित कर व्याख्या के साथ दर्शाया गया। आगंतुकों ने संविधान प्रदर्शनी का अवलोकन कर इतिहास को जाना।

नारद जी के संचार दर्शन पर जीवन दर्शन-
पत्र वाचन करते हुआ शिक्षाविद गणेश कलाल ने कहा कि देव ऋषि नारद के दिखाएं मार्ग पर आज आधुनिक पत्रकारिता खड़ी है। विश्व के प्रथम संवाददाता स्वर्ग, धरती और पाताल के निवासियों में परस्पर समन्वय व संवाद स्थापित करते हैl इसी को हम आदर्श पत्रकारिता मान सकते हैं। समाचार को जैसा है, वैसा पहुंचना उनका स्वभाव था। नारद जी ने सूचनाओं को वास्तविक तथ्यों के साथ आगे बढ़ाया था । नारद जी ने देवताओं और व्यक्तियों के बीच संवाद स्थापित किया । उन्होंने दैत्यों की बात भी देवताओं तक पहुंचने में पूरी निष्पक्षता बरत पत्रकारिता धर्म निभाया। यही वजह है कि देत्य भी उन्हें सम्मान देते थे l वे जानते थे कि उनका काम सूचनाए देना और उसका समाधान देना है। उन्होने विवाद की बजाय संवाद को वरियता दी। युग के साथ मीडिया के बदलते स्वरूप में भी नारद मुनि से बड़ा कोई इंस्टिट्यूट नहीं हो सकता है ।

By Udaipurviews

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