उदयपुर। नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के नव प्रकल्प राष्ट्र मंदिर के माध्यम से गुमनाम क्रान्तिकारियों को जीवन्त कर दिया गया है। ये विचार पंजाब के राज्यपाल गुलाबचन्द कटारिया ने व्यक्त किए। वे सोमवार को गुलाब बाग स्थित नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के नव प्रकल्प राष्ट्र मंदिर का अवलोकन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के 18 मानस पुत्र जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों को आहूत किया। ऐसे गुमनाम क्रान्तिकारियों के त्याग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महान् दानवीर स्मृतिशेष पूज्य महाशय धर्मपाल जी के पुत्र महाशय राजीव जी गुलाटी ने इनके सिलिकॉन स्टेच्यू का निर्माण करवाया। ऐसे दानवीर ने समाज में आदर्श स्थापित किया है। यह प्रकल्प आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने ख्याति प्राप्त कर विभिन्न ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द जी ने अपने जीवन की जो आहूति दी वह भारत के चुतुर्दिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बालिका शिक्षा,सामाजिक अस्पृश्यता तथा पाखण्ड के उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी प्रेरणा से देश को स्वतंत्र करवाने के लिए कई क्रान्तिकारियों ने अपने प्राणों को आहूत किया। उनके जीवन चरित्र को राष्ट्र मंदिर के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया है। मैं समझता हूं कि धीरे धीरे देश अपने अतीत को जानने लगा है। यहां निर्माण किए गए राष्ट्र मंदिर से आज की पीढ़ी प्रेरणा प्राप्त करेगी और उनसे मेरा अनुरोध है कि इसको देखें और देश के लिए अपने प्राणों को आहूत करने वाले गुमनाम क्रान्तिकारियों से प्रेरणा प्राप्त कर और देश के लिए उसी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करें ताकि राष्ट्र के निर्माण में वे अपना योगदान दे सके।
इस अवसर पर श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने कहा कि कटारिया का जुड़ाव नवलखा महल से इसकी स्थापना से ही रहा है। नवलखा महल वह स्थल है जो कि मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा सज्जन सिंह का अतिथि गृह था तथा उनके निमंत्रण पर महर्षि दयानन्द सरस्वती ने यहां साढ़े छह माह प्रवास किया और अपनी कालजयी कृति सत्यार्थ प्रकाश का प्रणयन किया था। यह स्थल आर्य समाज को प्राप्त होने से पूर्व राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग का गोदाम था। उक्त स्थल को आर्य समाज को दिलाने में कटारिया जो कि उस समय उदयपुर के सांसद थे, उन्होंने राजस्थान सरकार से इस स्थल को आर्य समाज को दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्र मंदिर के प्रकल्प ने गुमनाम क्रान्तिकारियों को जीवन्त किया : कटारिया
