संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान राजस्थानी लोक गीतों की अविरल धारा बही। सुर साधकों की सूची में रंजना भाटी ने ‘मीरा बाई का भजन’, योगेश उपाध्याय ने छाप तिलक सब, मेघा गोस्वामी ने ‘थाने काजलियो बना लूं’, संगीता गोस्वामी ने ‘बन्ना रे मारो मदारिया’, नूतन बेदी ने ‘चाँद चढ्यो गिगनार’, और विकास स्वर्णकार ने ‘चौधरी’ गीत से समां बांधा। इसी क्रम में आराध्या वैष्णव ने ‘खम्मा घणी’, सी.पी. गन्धर्व ने ‘पल्लो लटके रे म्हारो’, नूतन सेन ने ‘बाईसा रा बीरा जयपुर जाजो जी’, गीता सिंह ने ‘बन्ना रे बागां में झूला’, वीणू वैष्णव ने ‘खेलण दियो गणगौर’, विजय सिंह राजपूत ने ‘होलीया में उड़े रे गुलाल’ और मधु शर्मा ने ‘नैना रा लोभी’ की सुमधुर प्रस्तुति दी।
सांस्कृतिक संध्या को आगे बढ़ाते हुए ज्योति मोडियानी ने ‘धरती धोरा री’, नीलम पटवा ने ‘मोरिया आछो बोल्यो रे’, निखिल माहेश्वरी ने ‘नीले घोड़े रा असवार’, मोहनलाल स्वर्णकार ने ‘कुरजां ए म्हारो भंवर मिला’, गोपाल गोठवाल ने ‘मोर बोले रे मल जी’, अरुण कुमार चौबीसा ने ‘तालरिया मगरिया रे’, दिलीप गबरानी ने ‘मोरनी बागां में बोले’ और नीलम कौशल ने ‘नखरालो देवरियो’ गीत गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। निशा राठौर ने ‘चिरमी मारी’, शगुन जैन ने ‘छोटी सी उमर परनाई’, रजलेश ने ‘और रंग दे रे माने’,
किशोर यादव ने ‘हल्दीघाटी में समर’, मीनाक्षी शर्मा ने ‘माने काजलियो मांगा दे’ पर मनमोहक नृत्य, अजीत सिंह खींची ने ‘ब्याह बिंदनी’ और सूर्य वैष्णव ने ‘उमराव माने बोली’ और रामेश्वर पनेरी ने ‘बादली रो पानी साया’ के अलावा कमल कुमार जुनेजा, गौरव स्वर्णकार , राजेन्द्र सनाढ्य, विष्णु वैष्णव, सीपी जैन, भावना जैन, अनुराधा श्रीवास्तव, बृजेश कुमार मिश्रा, गजेन्द्र सिंह, गुंजन जैन, रमा मांडोवरा आदि ने भी शानदार प्रस्तुतियां दी।
संस्थान के कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि कार्यक्रम में सभी प्रतिभागी राजस्थानी वेशभूषा और आभूषणों में सजे थे, जो आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान संगीत के साथ-साथ महिला सदस्यों ने आकर्षक परिवेश में मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां भी दी।
संस्था के सचिव अरुण चौबीसा ने बताया कि आयोजन के अंत में संयोजक विष्णु वैष्णव, नूतन वेदी, विकास स्वर्णकार और गोपाल गोठवाल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने ‘सुरों की मंडली’ के इस प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की।
