फतहनगर। श्री मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर, भगवा सर्कल पर पहली बार आयोजित सामूहिक श्री नवाह्नपारायण रामायण पाठ का नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च 2026 तक चले इस आयोजन ने पूरे नगर को राममय बना दिया।
समापन दिवस पर रामायण के अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग—भरत मिलाप, राम राज्याभिषेक, अंगद प्रेम और काकभुशुण्डि संवाद—का सस्वर एवं भावपूर्ण पाठ किया गया। इन प्रसंगों के दौरान वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा व्याप्त रही कि उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे।
विशेष रूप से पाठ विराम के दिन नगर के पुरुष एवं महिला मानस प्रेमियों ने एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से रामायण पाठ किया। मंदिर परिसर में एकता, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूजन एवं आव्हान की विधि श्री सुबोधजी पाराशर द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न करवाई गई, जिसने आयोजन को और अधिक पवित्रता प्रदान की।
मुख्य व्यासपीठ पर प्रतिष्ठित मानस पाठकों—श्री दिनेशजी गर्ग (अध्यापक), श्री राजुभाई (रामपायक), श्री अशोक जी अग्रवाल, श्री रामेश्वर जी शर्मा एवं श्री नटवरजी अग्रवाल—ने विराजमान होकर उत्साहपूर्ण उद्घोष के साथ सस्वर पाठ किया। उनकी वाणी में भक्ति का ऐसा प्रवाह था कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
पाठ के विश्राम के पश्चात पं. श्री सीतारामजी शर्मा द्वारा श्री रामायणजी एवं हनुमानजी की विधिवत महाआरती की गई। आरती के समय मंदिर परिसर “जय श्री राम” और “हनुमान जी महाराज की जय” के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
सांयकाल 4 बजे से हवन, पूर्णाहुति, महाआरती एवं महाप्रसादी के साथ इस दिव्य आयोजन का समापन हुआ। हवन की पवित्र अग्नि में आहुतियां देकर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि एवं लोककल्याण की कामना की।
इस प्रथम आयोजन की सफलता ने न केवल भक्तों के हृदय में गहरी छाप छोड़ी, बल्कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के प्रति उत्साह को भी और अधिक प्रबल किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों की आस्था, समर्पण और सामूहिकता ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म कार्य करता है, तो वह एक उत्सव बन जाता है।
