उदयपुर। राजस्थानी सिनेमा में एक ऐसी फिल्म दस्तक देने जा रही है जो परंपराओं के नाम पर समाज में व्याप्त कुरीतियों की जड़ों पर सीधा प्रहार करेगी। ‘तितरी प्रोडक्शन’ और ‘एम स्क्वायर प्रोडक्शन एंड इवेन्ट्स’ के बैनर तले बनी फीचर फिल्म ‘उधड़न’ के कुछ दृश्यों को उदयपुर के भुवाणा स्थित विंध्यम गार्डन में प्रदर्शित किया गया, जिसने अपनी मर्मस्पर्शी कहानी और प्रभावशाली दृश्यों से सभी को झकझोर कर रख दिया।
रिश्तों के उधड़ने की एक अनूठी दास्तां
फिल्म का ताना-बाना एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के इर्द-गिर्द बुना गया है, जहाँ कच्ची उम्र में ब्याही गई एक बेटी की न डोली उठती है और न बिदाई होती है। पहली बार ससुराल जाने के वक्त उसका सामना अपने फौजी पति की तिरंगे में लिपटी देह से होता है। यहाँ फिल्म एक अजीबो-गरीब और दर्दनाक रिवाज को दिखाती है, जहाँ नायिका को अपने मृत पति के शव के साथ ‘उल्टे फेरे’ लेकर सात फेरों के पवित्र बंधन को उधेड़ना पड़ता है। इसी भावनात्मक उथल-पुथल और रिश्तों की मुक्ति की कहानी है ‘उधड़न’।
बड़े कैनवास पर राजस्थानी गौरव
फिल्म के निर्माता मुकेश माधवानी ने बताया कि ‘उधड़न’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। उन्होंने कहा, “यह फिल्म नारी सशक्तिकरण और रिश्तों की उलझनों को एक नई दृष्टि से पेश करती है। इसकी शूटिंग उदयपुर के साथ-साथ कोटा, जयपुर और टोंक जैसी भव्य लोकेशन्स पर बड़े स्तर पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म राजस्थानी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और अलग पहचान दिलाएगी।
दिग्गज कलाकारों और अनुभवी निर्देशन का संगम
‘तितरी’, ‘चौसर’, ‘उड़ान जिंदगी की’ और ‘बाहुबली राजस्थानी’ जैसी सफल फिल्में दे चुके अनुभवी निर्माता-निर्देशक विपिन तिवारी इस फिल्म के सह-निर्माता हैं। उन्होंने जानकारी दी कि फिल्म में राजस्थान के नामचीन कलाकारों के साथ-साथ बॉलीवुड के चेहरे भी नजर आएंगे। युवा निर्देशक अमिताभ तिवारी के निर्देशन में बन रही यह फिल्म तकनीकी रूप से भी बेहद सुदृढ़ है। टीजर में दिखाए गए भारतीय सेना और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ के दृश्य और नायिका का अपनी दादी से बाल विवाह पर किए गए तीखे सवाल-जवाब फिल्म की गहराई को दर्शाते हैं।
जवान, किसान और नारी संघर्ष का चित्रण
विपिन तिवारी ने बताया कि फिल्म की कहानी पारंपरिक सोच से हटकर एक नई दिशा प्रदान करती है। इसमें सीमा पर तैनात वीर जवानों और खेतों में पसीना बहाते किसानों के जीवन के साथ-साथ समाज में महिलाओं के मूक संघर्ष को विशेष रूप से उभारा गया है। ‘उधड़न’ राजस्थानी सिनेमा के इतिहास में एक ‘मील का पत्थर’ साबित होने की क्षमता रखती है।
