आत्मविश्वास और संकल्प को मिली नई उड़ान
उदयपुर, 25 फरवरी। एशियन लैक्रोज गेम्स में भारतीय पुरुष एवं महिला टीम द्वारा सऊदी अरब के रियाद शहर में हासिल की गई ऐतिहासिक दोहरी स्वर्ण पदक उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। इस अभूतपूर्व सफलता में राजस्थान के जनजातीय अंचल से आए खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष आज देश के लिए प्रेरणा बन गया है।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद राजस्थान के इन होनहार खिलाड़ियों के सम्मान एवं मनोबल बढ़ाने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में राजस्थान के जनजातीय क्षेत्र से जुड़े खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों ने उदयपुर संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी के नेतृत्व में जयपुर स्थित लोक भवन में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से शिष्टाचार भेंट की।
राज्यपाल ने की मुक्तकंठ से सराहना
राज्यपाल श्री बागडे ने एशियन लैक्रोज गेम्स में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि जनजातीय अंचल के खिलाड़ियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के अनुशासन, समर्पण और खेल भावना को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी। राज्यपाल ने लैक्रोज खेल के समग्र विकास के लिए विशेष प्रावधान लागू करने का भरोसा दिलाया तथा ओलंपिक से पूर्व होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दीं।
वित्तीय सहयोग और सम्मान
राज्यपाल के विवेकाधीन कोटे से लैक्रोज खेल को निरंतर मिल रहे वित्तीय सहयोग के लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षक एवं राजस्थान लैक्रोज संघ द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर जनजाति विकास विभाग की ओर से लैक्रोज खेल पर आधारित बनफूल ट्राइबल डिजाइन स्टूडियो के जनजातीय कलाकार द्वारा निर्मित एक आकर्षक रंगीन पेंटिंग राज्यपाल को भेंट की गई, जो जनजातीय खिलाड़ियों के संघर्ष और सफलता का प्रतीक बनी।
प्रेरणादायक फिल्म का प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान 13 मिनट की प्रेरणादायक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस फिल्म में प्रमुखतः राजस्थान स्टेट माइन्स एंड मिनिरल्स लिमिटेड के आर्थिक सहयोग से जनजातीय अंचल के खिलाड़ियों के संघर्ष, सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की कहानी को भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे सभी उपस्थितजनों ने सराहा।
विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस सम्मान समारोह में जनजाति विकास विभाग के सचिव वरिष्ठ आईएएस कुंजीलाल मीणा, राजस्थान राज्य खेल परिषद के अध्यक्ष आईएएस नीरज के. पवन, लोक भवन के सचिव आईएएस डॉ. पृथ्वीराज, अतिरिक्त आयुक्त निशु कुमार अग्निहोत्री, राजस्थान लैक्रोज संघ के अध्यक्ष अशोक परनामी, सीईओ शहजाद खान, कोषाध्यक्ष महेंद्र सिंह, बीडीओ प्रियंका मीणा सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी एवं खेल जगत से जुड़े गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री से भेंट, मिला सरकार का आश्वासन
राजस्थान लैक्रोज संघ के अध्यक्ष अशोक परनामी के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निवास पर उनसे मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की ऐतिहासिक उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए उन्हें मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और कहा कि यह सफलता राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार की ओर से खेल संसाधन, प्रशिक्षण एवं आधारभूत सुविधाओं के लिए यथा संभव हर सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा भी उपस्थित रहे।
पहली सरकारी लैक्रोज अकादमी की सौगात
खिलाड़ियों ने राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा में भारत की पहली सरकारी लैक्रोज अकादमी की स्वीकृति के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इससे प्रदेश के जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा। साथ ही उदयपुर विकास प्राधिकरण एवं जिला प्रशासन द्वारा महाराणा प्रताप खेल गांव में लैक्रोज मैदान निर्माण का कार्य भी लगभग पूर्णता की ओर है, जिससे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा।
ऊँचे हौसले, बड़ा सपना
इन प्रेरणादायक मुलाकातों, सम्मान समारोहों और निरंतर सरकारी प्रोत्साहन के बाद खिलाड़ियों का मनोबल सातवें आसमान पर है। खिलाड़ी अब और अधिक आत्मविश्वास के साथ आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं एवं ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भारत के लिए स्वर्णिम सफलता दोहराने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह सफलता न केवल खेल जगत के लिए, बल्कि जनजातीय समाज के युवाओं के लिए भी यह संदेश है कि संघर्ष, समर्पण और अवसर मिलने पर कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
