संघ व्यक्ति के सामूहिक कर्माचरण का उदाहरण: अनुपम 

व्यक्तिगत लगाव ध्येय सिद्धि में बाधक : अनुपम 
तत्त्वमसि का मुख्य पात्र विचार है, व्यक्ति नहीं : मनीष
विश्व संवाद केंद्र उदयपुर के स्थापना दिवस पर पुस्तक परिचर्चा एवं ग्राफिक्स कार्यशाला आयोजित
उदयपुर, 23 फरवरी। विश्व संवाद केन्द्र चित्तौड़ प्रांत का 27वां स्थापना दिवस केआ कार्यक्रम सेक्टर 4 स्थित कार्यालय परिसर में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में ग्राफिक्स मेकिंग पर कार्यशाला का आयोजन किया गया एवं द्वितीय सत्र में श्रीधर पराड़कर द्वारा संघ प्रचारक के जीवन पर लिखित उपन्यास “तत्वमसि” पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
उपन्यास “तत्त्वमसि” पर परिचर्चा सत्र में मुख्य वार्ताकार राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय उदयपुर के हिन्दी के सह आचार्य डॉ अनुपम और गुरूकुल महाविद्यालय उदयपुर के प्राचार्य डॉ मनीष सक्सेना रहे।
डॉ अनुपम ने कहा कि उपन्यास शैली में लिखित इस पुस्तक में अधिकांश भाग युवा पात्रों के इर्द-गिर्द है। बल्कि सामाजिक विमर्श को लेकर उपन्यास युवाओं की तरफ आशान्वित है। उपन्यास प्रश्नोत्तर शैली में है और प्रभावी सूक्तियां प्रसंगों का मार्मिक चित्रण करती है।
डॉ अनुपम कहते है कि प्रचारक के जीवन में सादगी होती है। न्यूनतम उपभोग में जीवन यापन करना भारतीय परंपरा में सम्मान का विषय रहा है। कार्यकर्त्ता की चिंता से लेकर नवीन प्रचारक की देखभाल तक पर प्रकाश डाला गया है।
उन्होंने कहा कि उपन्यास स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत लगाव ध्येय सिद्धि में बाधक है। कार्य विस्तार के लिए प्रवास के लिए निकलना पड़ता है। एक तरह से संघ व्यक्ति का सामूहिक कर्माचरण का सटीक उदाहरण है।
डॉ मनीष सक्सेना ने कहा कि उपन्यास के केन्द्र में 75 वर्षीय संघ प्रचारक परितोष बाबू का पात्र है। जिनका जन्म उड़ीसा में और संघ कार्य के लिए भोपाल में निवासरत है। उपन्यास का नायक मुख्य पात्र नहीं, बल्कि इस पुस्तक का नायक विचार है। विचार से कटकर व्यक्ति रिक्त है। विचार में विलीन होकर ही व्यक्ति अहंकार से मुक्त हो जाता है।
डॉ मनीष ने कहा कि उपन्यास में एक प्रचारक द्वारा जीवनभर समाज को देते रहने का समर्पण भाव दिखाई देता है। साथ ही देते-देते देवत्व का भाव ना आ जाये, इसे लेकर भी सावचेत किया जाता है और मुख्य पात्र का सामान्य मनुष्य के रूप में ही चित्रण किया गया है। भगवा ध्वज के रूप में तत्व को गुरू की मान्यता देना संघ में व्यक्ति पूजा को गौण कर देता है। व्यक्तित्व की यात्रा में सबसे बडा बाधक अहंकार को बताया गया है। 27 अध्याय के इस उपन्यास में 57 नामजद पात्र है।
ग्राफिक्स मेकिंग की कार्यशाला को अजय पालीवाल एवं डॉ सुनील खटीक ने बारीकियों को साझा किया। जिसमें ग्राफिक्स के साथ शब्द व चित्र चयन, कैलेण्डर दिवस, तथ्य की सत्यता, AI का सटीक उपयोग आदि पर जानकारियां साझा की गई।
इससे पूर्व विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला ने केन्द्र का परिचय रखा। संचालन हनुमान सिंह और धन्यवाद गणेश लाल ने किया।
कार्यक्रम में विकास छाजेड़, मनीष मेघवाल, लक्ष्मण कुंवर, अर्जुन खींची, चेतन सहित ने अपने विचार साझा किए एवं अनेक अध्येता उपस्थित रहे।
By Udaipurviews

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