उदयपुर। बिज़नेस सर्कल इंटरनेशनल (बीसीआई ) द्वारा आयोजित प्रेस मीट में बीसीआई के चेयरमैन मुकेश माधवानी ने कहा कि उदयपुर को अब केवल झीलों का शहर ही नहीं, बल्कि मिलियनेयर्स का शहर भी कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उदयपुर में प्रतिभा, उद्यमशीलता और वैश्विक सोच की कोई कमी नहीं है—ज़रूरत है तो केवल सही दिशा, सही मंच और सही नेटवर्क की।
बीसीआई उदयपुर में एक विशेष मास्टर क्लास का आयोजन कर रहा है, जो उद्यमियों, स्टार्टअप्स, निजी क्षेत्र के प्रोफेशनल्स, मैनेजर्स, एसएमई संचालकों और बिज़नेस लीडर्स के लिए है—उनके लिए जो अच्छा कर रहे हैं, लेकिन 10X ग्रो करना चाहते हैं। यह मंच खास तौर पर उन स्थानीय प्रतिभाओं के लिए है जो लोकल से ग्लोबल जाना चाहते हैं, पर उन्हें वैश्विक दृष्टि, रणनीति और कनेक्शन्स की आवश्यकता है।
श्री माधवानी ने स्पष्ट किया कि यह बीसीआई सत्र न तो केवल मोटिवेशनल है—जिसका असर कुछ दिनों तक ही रहता है—और न ही यह केवल ज्ञान (ज्ञान-सत्र) है, क्योंकि आज ज्ञान इंटरनेट पर हमारी आवश्यकता से कहीं अधिक उपलब्ध है। बीसीआई का फोकस इस बात पर है कि उपलब्ध ज्ञान को कैसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और उसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में कैसे बदला जाए।
उन्होंने कहा कि बीसीआई का उद्देश्य प्रतिभागियों को व्यावहारिक फ्रेमवर्क, वास्तविक केस स्टडीज़, नेटवर्क एक्सेस और एक्शन-ओरिएंटेड सोच प्रदान करना है, ताकि वे अपने बिज़नेस और करियर को अगले स्तर पर ले जा सकें।
बीसीआई का मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन और वैश्विक संपर्क उपलब्ध हों, तो उदयपुर आने वाले समय में देश और दुनिया के लिए नए उद्यमी, निवेशक और लीडर्स तैयार कर सकता है—और तभी उदयपुर वास्तव में मिलियनेयर्स का शहर कहलाएगा।
आरिफ शेख ने कहा कि
आज का दौर बहुत तेज़ है।
और इस दौर में एक बात बिल्कुल साफ़ है —
जो आज सीख रहा है, वही कल बाज़ार लीड करेगा।
विज़न का मतलब सिर्फ़ खुद आगे देख लेना नहीं होता,
विज़न वो है जो दूसरों को भी आगे देखने की ताक़त दे।
क्योंकि टीम छोटी हो सकती है,
लेकिन सोच कभी छोटी नहीं होनी चाहिए।
अंशुल मोगरा ने बताया कि
सपने वो नहीं होते जो हम सोते वक्त देखते हैं,
सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।
और ऐसे सपनों के लिए सही समय का इंतज़ार नहीं किया जाता —
अपने फैसलों से सही समय खुद बनाया जाता है।
लक्ष्य हमेशा इतना ऊंचा रखना चाहिए
कि उसे हासिल करने में मज़ा आए।
क्योंकि अगर आप चलते रहेंगे,
तो रास्ते खुद बनते चले जाएंगे।
अमृता ने कहा कि
इतिहास गवाह है —
जिन्होंने खुद को बदल दिया, वही दुनिया बदलने का दम रखते हैं।
और जब तक आप खुद को नहीं हराते,
तब तक कोई आपको हरा नहीं सकता।
देवेन्द्र सिंह ने कहा कि
अगर आप भीड़ में खोना नहीं चाहते,
तो भीड़ से अलग सोचना पड़ेगा।
क्योंकि अगर आप दूसरों से एक कदम आगे नहीं हैं,
तो आप अपने-आप पीछे रह जाएंगे।
बिज़नेस में हर आइडिया सोने की खान होता है,
बस ज़रूरत है उसे सही तरीके से खोदने की।
और याद रखिए —
आने वाला कल उन्हीं का होता है जो आज उसकी तैयारी करते हैं।
असली सफलता पुराने दरवाज़े खटखटाने में नहीं,
नए अवसरों को पहचानने और पकड़ने में होती है।
और इसकी शुरुआत एक ही जगह से होती है —
पहले खुद पर भरोसा करो,
फिर दुनिया अपने व्यापार पर भरोसा करेगी।
