उदयपुर। सनातन पाठशाला समिति, उदयपुर द्वारा दिल्ली पब्लिक स्कूल, उदयपुर में उद्बोधन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ वैदिक मंगलाचरण एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। विद्यालय के प्राचार्य श्री संजय नरवरिया ने समिति के पदाधिकारियों का उपरणा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म हमारी सभ्यता और संस्कृति का मूल आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहार दीपावली का मानव जीवन में विशेष महत्व है। यह जीवन में सत्य, अहिंसा, ईमानदारी व संस्कारों की जीत का पर्व है, जो जीवन को सकारात्मक ऊर्जा के आलोक से प्रकाशित कर देता है। इस कार्यक्रम को कक्षा 8 के छात्रों ने प्रार्थना सभा से गति प्रदान की। वैदिक पुरोहित एवं सनातन पाठशाला गीता परिवार के सहसंयोजक श्री भूपेंद्र जी शर्मा ने गायत्री मंत्र की व्याख्या कर छात्रों को मंत्र की उपादेयता समझाइ। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित मोटिवेशनल स्पीकर श्री आशीष जी सिंघल ने वेद, उपनिषद, पुराण आदि में बताए गए – तनाव नियंत्रण, जीवन मूल्य, सदाचार आदि का विश्लेषण किया। अष्टांग योग, आसन, प्राणायाम, ध्यान को सनातन मानते हुए उनमें बताए गए मूल्य को समझाया। षड्दर्शन में सनातन की अवधारणा को भी स्पष्ट किया। अंतर्राष्ट्रीय योग शिक्षक श्री सुरेश जी पालीवाल ने ध्यान एवं योग द्वारा सत्र को आध्यात्मिक बनाया। अपना घर आश्रम एवं सनातन पाठशाला समिति के अध्यक्ष श्री गोपाल जी कनेरिया ने कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया और छात्रों को पुरस्कृत किया। सनातन पाठशाला समिति द्वारा प्रस्तुत उद्बोधन सत्र का संचालन समिति संयोजक श्री नवनीत जी भट्ट ने किया। विद्यालय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत भजन एवं राम स्तुति ने उपस्थित समुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रो वाइस चेयरमैन श्री गोविंद अग्रवाल ने इस सत्र की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को सद्मार्ग पर प्रशस्त करने हेतु यह सर्वोत्तम माध्यम है। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विद्यालय के उप प्राचार्य श्री राजेश धाभाई ने सनातन संस्कृति द्वारा प्राप्त संस्कारों को आत्मसात करने पर जोर दिया। अतिथियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अंशु कालरा एवं श्री देवकीनंदन आमेटा ने किया।
डीपीएस उदयपुर में विशेष जीवन कौशल हेतु उद्बोधन
