उदयपुर। रोटरी क्लब उदय के एडमिनिस्ट्रेटिव /डायरेक्टर अशोक वीरवाल ने बताया कि एक तरफ जहां देश-विदेश वैज्ञानिक स्तर पर चांद और तारों को छूने की बाते करते है जहां लोग हर स्तर पर समय के साथ आगे बढ़ चुके हैं वही राजस्थान का मेवाड़ क्षेत्र समय के साथ आगे तो बढ़ा पर अपनी संस्कृति और सभ्यता को कभी नहीं भूला जैसे कि पर्यूषण का पर्व हो या राजस्थानी लोक नृत्य हो , इस नृत्य की श्रृंखला में से एक है गवरी नृत्य जिसे भील आदिवासी समाज बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाता है । गवरी केवल एक नृत्य नहीं बल्कि भक्ति, अनुशासन और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है , इसके प्रमुख पात्र कालूकिर, वरजूकँजरी बादशाह की फौज, लखा बंजारा, कांगुजरी आदि मुख्य आकर्षण का केंद्र है, गवरी लोक नाट्य प्रमुख सूत्रधार कटकुडिया होता है यह इस नाटक का मुख्य सूत्रधार है और कथानक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह नृत्य नाटिका आगे बढ़ती है यह नृत्य पूरे मेवाड़ में बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है और ये पर्व 40 दिन तक चलता है।
गत दिनों वीरवाल अपने समूह के साथ भील आदिवासी वर्ण से मिलने गए, वहाँ उन्होंने भील समुदाय द्वारा गवरी नृत्य प्रस्तुति देखी जो कि मां गौरी (शक्ति) और भगवान शिव को प्रसन्न किए जाने के लिए किया गया, नृत्य के माध्यम से कथाएं भी प्रस्तुत की गई।
इस कार्यक्रम में उपस्थित गॉड ग्रेस डेंटल क्लीनिक की संचालिका डॉक्टर अनीता मौर्या व समाज सेविका अनीता वीरवाल ने बताया कि यह नृत्य रक्षाबंधन के बाद शुरू हो जाता है और 40 दिन तक चलता है इसमें महिला कलाकार कोई भी नहीं होता महिलाओं के किरदार को पुरुष उनके वेशभूषा धारण कर खुद अभिनय कर निभाते हैं व अशोक वीरवाल ने कलाकारों व नृत्य की प्रशंसा करते हुए बताया कि हमें हमारे परंपरागत जो भी नृत्य वह कार्यक्रम होते हैं इसमें आमजन को भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभानी चाहिए जिससे हमारी परंपरा विलुप्त ना हो।
