उदयपुर। राजस्थान में लुप्त हो रहे संगीत को पुनर्जीवित करने के प्रयास के तहत आज अशोका पैलेस में विश्व संगीत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर संगीत की दी गई लाइव प्रस्तुतियों से संगीत की स्वर लहरियंा गूंज उठी।
एम स्क्वायर प्रोडक्शन के सीईओ मुकेश माधवानी ने बताया कि निर्देशक बक्स खान के नेतृत्व में
कलाकरों ने केशरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश से स्वागत गीत की प्रस्तुति दी।
इसके बाद किरण भाटी द्वारा आकर्षक विश्व प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य दी गई। इसके अलावा कार्यक्रम में सूफी दामा बांध मस्त कलंदर, सूफी छाप तिलक, राजस्थानी भवई नृत्य,निम्बूरा-निम्बूरा गीत की बक्स खान, फ़िरोज़ खान, खेता खान मंगनियार,आसिन खान लंगा,रोशन खान लंगा, भंवरू खान लंगा, कोडे खान मंगनियार, जाकिर खान हमीरा, नर्तकी मींरा भाटी,किरण भाटी ने कमायचा,
सिंधी सारंगी, मटका, खड़ताल, मोरचंग, भपंग,हरमोनियम व ढोलक के साथ संगीत की जो प्रस्तुतियंा दी गई उससे दर्शक उसी में खो से गये।
माधवानी ने बताया कि विश्व संगीत दिवस प्रत्येक वर्ष 21-जून को दुनिया भर में मनाया जाता है और इसका उद्देश्य संगीत की स्वरवभौमिक भाषा के उत्सव के माध्यम से दुनियाभर के लोगों को एकजुट करना है।
संगीत एक बहुत ही प्रभावशाली माध्यम है, जो एकता, सांस्कृतिक आदान प्रदान, संवेदनशीलता, शांति, मनोरंजन इत्यादि का महत्वपूर्ण माध्यम है जो सदियों से एवं आज के इस भौतिक युग में मानसिक तनाव को कम करता है एवं मनुष्य में रचनात्मक सोच को बढ़ावा देता है एवं शांति एवं सौहार्द का वातावरण उत्पन्न करता है।
राजस्थान में संगीत की एक समृद्ध विरासत है एवं राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जैसे मारवाड़, पश्चिम राजस्थान, शेखावाटी, मेवाड़, ढूंढाड़ इत्यादि क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की नृत्य एवं गायन शैलियां प्रचलित हैं एवं विभिन्न प्रकार के अनूठे वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुत की जाती है तथा कई शैलियों की विश्व भर में अनूठी पहचान है। घूमर, भवाई, कालबेलिया, चरी, डांडिया, कच्छी घोड़ी, तेरह ताल, गैर, कठपुतली, पाबूजी की फंच, मांड, पनिहारी इत्यादि लोक नृत्य राज्य के विभिन्न स्थानों पर प्रचलित हैं तथा लोकप्रिय हैं।
पीएचडी चेंबर के निदेशक आर के गुप्ता ने बताया की पीएचडी चैम्बर आने वाले समय में अपने विभिन्न कार्यक्रमों एवं नवाचारों के माध्यम से राज्य में विलुप्तता के कगार पर कड़ी संगीत की प्रतिभाओं, शैलियों एवं वाद्य यंत्रों के पुनर्जीवन के लिए आगे भी विभिन्न संगठनों एवं सरकार के साथ मिलकर कार्य करता रहेगा।
विश्व संगीत दिवस-2024”’ में गूंजी संगीत की स्वर लहरियां
