धातुओं का चिकित्सा में प्रयोग भारत का मानवीय चिंतन

धातु, खान और तकनीक का आर्थिक एवं वैज्ञानिक महत्व
(सुविवि में खनिज, खदान एवं धात्विकी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न)

उदयपुर। खनिज, खदान और उनसे जुड़ी प्रौद्योगिकी संसार की समृद्धि के लिए आवश्यक है। धातु यदि देशों को धनी बनाते रहे हैं तो जीवन के संस्कारों और स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। भारतीय चिंतकों ने धातुओं के बहुदृष्टि उपयोग पर विचार किया है।

प्रारंभ में कार्यक्रम की रिपोर्ट संगोष्ठी समन्वयक डॉ. पीयूष भादविया सहायक आचार्य, इतिहास विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय पढ़ी एवं अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी में कुल 55 पत्रों का पत्रवाचन हुआ। भारत के 14 राज्यों के प्रतिनिधि एवं श्रीलंका, आर्मेनिया एवं नेपाल से प्रतिनिधियों ने शोध पत्रों का वाचन किया।

उक्त विचार यहां सुखाडिया विश्वविद्यालय में शुक्रवार संपन्न ‘‘मिनरल्स, माईनिंग एंड मेटेलर्जी इन साउथ एशियाः हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव्स‘‘ विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में उभरे। इस संगोष्ठी में एशिया के अनेक देशों से आए विद्वानों ने अनेक सत्रों में अपने शोधपत्रों को पढ़ा और सिद्ध किया कि धातु, धन और धरती के लिए अनेक लड़ाइयां हुई हैं लेकिन अब मानवता के संरक्षण के लिए खनिज संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। संगोष्ठी के प्रायोजक आईसीएसएसआर, आरएसएमएमएल, वंडर सीमेन्ट एवं हिन्दुस्तान जिंक रहे हैं।

विशिष्ट अतिथि बिग्रेडीयर (रि.) सी. संदीप कुमार ने कहा कि हमें इस दौर में अनेक सावधानियां रखने की जरूरत है और हमें उद्यमिता और उद्योग ही नहीं, खनिज, खान आदि के विषय में गंभीर अध्ययन के लिए सोचना होगा। यह समय की आवश्यकता भी है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध पुराविद प्रो. जीवनसिंह खरकवाल ने प्राचीन भारत में खनन कार्य और खनिज संसाधनों की उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि भारत में धातुओं की प्राप्ति संसारभर को चकित करती हैं।

नेपाल की प्रो. पूनम आर. एल. राणा ने कहा कि यह संगोष्ठी छात्रों के लिए ही नहीं, विद्वानों के लिए भी बहुत प्रेरक रही है। धातु भारत ही नहीं, नेपाल तक भी जीवन के संस्कारों से जुड़े हुए हैं।

अध्यक्षता कर रहे सुविवि के संकाय अध्यक्ष प्रो. पूरणमल यादव ने कहा कि सुश्रुत और चरक जैसे संसार के प्राचीन वैज्ञानिकों ने धातुओं का चिकित्सा की दृष्टि से उपयोग करने का निर्देश दिया है, यह बताता है कि समृद्धि देने वाले धातु स्वास्थ्य के साधक भी हैं। उन्होनंे इस संगोष्ठी को उपलब्धिमूलक बताते हुए संगोष्ठियों के पत्रों और शोध सम्मत विचारों की प्रंशसा की और उन्हें भविष्य में आगे शोध के लिए सर्वथा उपयोगी बताया।

इस संगोष्ठी में अमेरिका से नन्दन शास्त्री, अर्मेनिया की डॉ. नायरा मर्कचयन, श्रीलंका से डॉ. सोनाली दसनायके, डॉ. दसनायके, डॉ. उपेक्षा गमांग, प्रो. चुलानी रामबुकवेला, नलिन जयसिंहे सहित भारत के 14 राज्यो से प्रतिनिधि शामिल हो रहे है।

इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. शारदा श्रीनिवासन, डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू, डॉ. राजेन्द्रनाथ पुरोहित, डॉ. डी.पी. शर्मा, प्रो. भगतसिंह, प्रो. राजपाल, प्रो. अरूण वाघेला, कला महाविघालय की सह-अधिष्ठाता प्रो. दिग्विजय भटनागर, विभागाध्यक्ष प्रतिभा, डॉ. वन्दनासिंह डॉ. समीर व्यास, डॉ. हसमुख सेठ, मोहित शंकर सिसोदिया, दिलावरसिंह, सुरेश कुमार, कृति कटारिया, प्रवेश कुमार, उमेश आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन निकिता खंडेलवाल, दीपाक्षी धाकड एवं सुचिता हिरण ने किया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!