उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में आयोजित धर्मसभा में बोलते हुए डॉ. वरुण मुनि महाराज ने कहा कि शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक अंग है आंख। बिना आंख और बिना दृष्टि के दुनिया में व्यक्ति का जीवन शून्य हो जाता है। हम हमारी आंखों से, नेत्रों से, हमारे चक्षुओं से संसार देख पाते हैं और प्रभु के दर्शन भी हमारी आंखों के द्वारा ही हो पाते हैं। आंख अच्छी वस्तुओ को भी देखती है खराब वस्तुओं को भी देखती है। अगर हमें दुनिया में शांति से जीना है तो खराब वस्तुओं को देखने से परहेज करना चाहिए।
उन्हेांने कहा कि हम हमेशा अच्छी वस्तुओं को देखने की आदत डालेंगे तो हमारे मन में हमेशा शुद्ध और अच्छे विचार ही उत्पन्न होंगे। हमारी आंखें ही दुनिया में राग बढ़ती है और आंखें ही द्वेष को बढ़ाने वाली होती है।
वरुण मुनि ने कहा कि दुनिया में राग, द्वेष, क्रोध, कषाय, मोह, माया के बढ़ने का कारण आंखों से ही पैदा होता है। मनुष्य को अपनी आंखों का उपयोग करने की भी जानकारी होना चाहिए। जिस तरह से कई बार कानों से सुनी बातें भी गलत साबित होती है उसी तरह से कई बार आंखों देखी भी गलत साबित हो सकती है। इस बात का ज्ञान हमें होना बहुत ही आवश्यक है। अगर हमारी दृष्टि और हमारा विश्वास पवित्र होगा तो हमारी आत्मा भी पवित्र हो पाएगी। संसार में कोई भी मनुष्य कितना ही उच्च कोटि का हो, कितना ही प्रतिष्ठित हो या कितना ही पढ़ा लिखा हो अगर उसके देखने की दृष्टि सही नहीं होगी तो उसका कोई महत्व नहीं होता है। दुनिया में आपके चरित्र का आकलन आपकी आंखें और आपकी दृष्टि से ही होता है। हमेशा अपनी दृष्टि को सही रखना ही उचित होता है। कहा भी जाता है कि बुरा मत देखो बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो। कोई भी व्यक्ति पापी नहीं होता कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं होता, बुरे तो उसके कर्म होते हैं। कई बार मनुष्य अपनी दृष्टि की वजह से दुनिया के सामने बुरा हो जाता है। अगर हमें हमारा चरित्र उज्जवल बनाना है, आत्मा का कल्याण करना है तो हमें हमारी दृष्टि को बदलनी होगी। हम बुरा देखेंगे ही नहीं तो हमारे मन में बुरे विचार आएंगे भी नहीं। अगर हमें बुरा दिखता भी है तो उसे देखकर आगे चल दो क्योंकि जब हम उस बुराई को दृष्टि के माध्यम से ग्रहण करेंगे तभी हमारे मन में बुरे विचार आएंगे।
धर्म सभा में अमृत मुनि ने भी उपस्थित होकर श्रावक श्राविकाओं को आशीर्वाद प्रदान किया। अखिलेश मुनि जी ने सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास अब अपने अंतिम चरण में है। नवकार महामंत्र के आराधना घर-घर में चल रही है। चातुर्मास में जो भी हमने धर्म लाभ लिया है और ले रहे हैं इससे हमारे जीवन का कल्याण निश्चित है। धर्म सभा में है बाहर से आने वाले गुरु भक्तों ने सुकुन मुनि का आशीर्वाद लिया एवं धर्म सभा में उनका स्वागत अभिनंदन किया गया।
दुनिया में शांति से जीना है तो खराब वस्तुओं को देखने से परहेज करना होगाःडॉ.वरूणमुनि
