मां नारसिंह भवानी के दरबार में भोर तक गूंजे गरबों के स्वर, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर हुआ चावंड

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें
शरद पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पारंपरिक वेशभूषा में भक्तों ने किया गरबा रास; भामाशाहों, कार्यकर्ताओं और ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजन बना यादगार
चावंड। धर्मनगरी चावंड में शरद पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर मां नरसिंह भवानी के दरबार में भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। शनिवार रात्रि को आयोजित भव्य गरबा रास कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। माता रानी के जयकारों, ढोल-नगाड़ों और गरबों की मधुर धुनों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने देर रात से लेकर भोर तक गरबा रास कर मां के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की।
दिलीप तेली ने बताया कि नारसिंह माता भक्त मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की मनमोहक झलक देखने को मिली। गरबा रास के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। आयोजन ने न केवल धार्मिक वातावरण को उल्लासमय बनाया, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और सामूहिक सहभागिता का संदेश भी दिया।
जताया सभी सहयोगकर्ताओं का आभार : मंदिर के भोपाजी नारायण लाल तेली, पंकज तेली एवं पुजारी कालूलाल तेली ने बताया कि शरद पूर्णिमा महोत्सव को सफल बनाने में समस्त ग्रामवासियों, क्षेत्रवासियों, कार्यकर्ताओं एवं भामाशाहों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी के सामूहिक प्रयासों और सहयोग से आयोजन की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संपन्न हुईं। उन्होंने महोत्सव में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक सहयोग और मां नरसिंह भवानी के प्रति श्रद्धा ही इस आयोजन की सफलता का आधार है।
भामाशाहों एवं सहयोगकर्ताओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका : महोत्सव के सफल आयोजन में विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने वाले भामाशाहों एवं सहयोगकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। सभी ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने में सहयोग किया।
जिसमें महाप्रसाद (खिचड़ी) व्यवस्था: प्रदीप, पिता दलजी पटेल, चावंड, जनरेटर व्यवस्था नितेश जैन, बजरंग, मुंबई, साउंड व्यवस्था प्रताप संस्थान, चावंड (प्रकाश शर्मा), टेंट व्यवस्था लोकेश कलाल, मुकेश पटेल, रोहित पटेल, विनोद, भरत एवं नरेश कुमार, डेकोरेशन व्यवस्था स्वर्गीय कांता देवी, पुंजालाल तेली, सराड़ा; कालूलाल तेली, चावंड; शांतिलाल जी तेली, महेंद्र कलाल एवं मोतीलाल  कलाल चावंड। पारितोषिक व्यवस्था हरीश टेलर, चावंड, जल व्यवस्था: हितेश एवं विनोद , पिता बृजलाल लोहार, चावंड, चाय व्यवस्था भेरुलाल पटेल, डांगी खेड़ा, फार्म हाउस व्यवस्था: ख्यालीलाल देवड़ा, चावंड की रही।
इन सभी भामाशाहों एवं सहयोगकर्ताओं ने अपने महत्वपूर्ण योगदान से महोत्सव की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त विभिन्न भामाशाहों ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया और समस्त ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों ने भी तन-मन और सामूहिक सहभागिता से आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
By Udaipurviews

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