– एसेट एलोकेशन, पीएमएस रणनीतियों, स्मॉल-कैप निवेश और आईपीओ में सीए की भूमिका पर रखे विचार
– आईसीएआई के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘चाणक्य-निवेश की नीति’ का समापन, निवेश रणनीतियों पर हुआ मंथन
– अंतिम दिन चार तकनीकी सत्रों में निवेश रणनीति, निवेशकों की मानसिकता और बाजार की संभावनाओं पर हुआ मंथन
– समापन समारोह में आयोजन में सहयोग देने वाले सदस्यों एवं प्रायोजकों का सम्मान
उदयपुर, 25 अक्टूबर। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) की वित्तीय बाजार एवं निवेशक जागरूकता समिति के तत्वावधान में आईसीएआई उदयपुर शाखा की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘चाणक्य-निवेश की नीति’ का रविवार को रामी रॉयल रिजॉर्ट में समापन हुआ। ‘प्राचीन बुद्धिमत्ता, आधुनिक बाजार’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में देशभर से आए वित्तीय विशेषज्ञों ने पूंजी बाजार के बदलते स्वरूप, निवेश की आधुनिक रणनीतियों, संपत्ति निर्माण के अवसरों और निवेशकों के व्यवहार सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
आईसीएआई उदयपुर शाखा के अध्यक्ष सीए चिराग धर्मावत ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं वित्तीय क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को पूंजी बाजार के बदलते परिदृश्य, निवेश के नए विकल्पों और आधुनिक निवेश रणनीतियों से अवगत कराना था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वित्तीय बाजार की कार्यप्रणाली को समझने के साथ निवेश संबंधी निर्णयों, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालीन संपत्ति निर्माण की रणनीतियों का ज्ञान होना आवश्यक है। ऐसे सम्मेलन पेशेवरों के ज्ञान को समृद्ध करने और विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
– दूसरे दिन चार तकनीकी सत्रों में निवेश रणनीतियों पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों ने निवेश के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। पहले तकनीकी सत्र में मुंबई स्थित इक्विट्री कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनीत काबरा ने ‘आस्ति आवंटन की रूपरेखा एवं पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं की रणनीतियां’ विषय पर विचार रखे। उन्होंने निवेश पोर्टफोलियो में विभिन्न परिसंपत्तियों के संतुलित आवंटन और पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं की रणनीतियों के महत्व को समझाया।
दूसरे सत्र में मुंबई स्थित प्रहस कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक सचिन जैन ने ‘निवेश में बौद्धिक क्षमता से अधिक महत्वपूर्ण है सही मानसिकता’ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि निवेश में केवल ज्ञान और विश्लेषण ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि धैर्य, भावनात्मक संतुलन, अनुशासन और सही मानसिकता भी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निवेश संबंधी निर्णय लेते समय भावनाओं पर नियंत्रण और दीर्घकालीन दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है।
तीसरे तकनीकी सत्र में नई दिल्ली स्थित कार्लेनियन एसेट मैनेजमेंट एंड एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के उपाध्यक्ष (बिक्री एवं व्यवसाय विकास) मुकेश बजाज ने ‘भारत में संपत्ति निर्माण की अगली पीढ़ी और स्मॉल-कैप निवेश के अवसर’ विषय पर चर्चा की। उन्होंने छोटी कंपनियों में निवेश की संभावनाओं, उनके विकास की क्षमता और भविष्य में संपत्ति निर्माण के अवसरों पर प्रकाश डाला। साथ ही निवेश के अवसरों का आकलन करते समय कंपनियों की संभावनाओं और जोखिमों को समझने के महत्व को रेखांकित किया।
दिन के अंतिम तकनीकी सत्र में मुंबई स्थित डीएएम कैपिटल एडवाइजर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हितेश मांडोत ने ‘अनुपालन से आगे भारतीय आईपीओ एवं पूंजी बाजार की विकास यात्रा में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका’ विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने भारतीय प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और पूंजी बाजार के विकास में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेशेवर अपने पारंपरिक अनुपालन संबंधी दायित्वों से आगे बढक़र कंपनियों को पूंजी बाजार से जुडऩे और विकास के अवसरों का लाभ उठाने में भी योगदान दे सकते हैं।
चारों तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को निवेश पोर्टफोलियो प्रबंधन, निवेशकों की मानसिकता, स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश की संभावनाओं और भारतीय पूंजी बाजार में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। इसके बाद समापन सत्र और हाई-टी के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
– सहयोगियों एवं प्रायोजकों का किया सम्मान
आईसीएआई उदयपुर शाखा के उपाध्यक्ष सीए सौरभ गोलछा ने बताया कि समापन समारोह में आईसीएआई उदयपुर शाखा की प्रबंध समिति की ओर से सम्मेलन के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सदस्यों, सहयोगियों और प्रायोजकों का सम्मान किया गया। शाखा की ओर से सभी सहयोगियों एवं प्रायोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। गोलछा ने कहा कि ‘चाणक्य-निवेश की नीति’ सम्मेलन ने प्रतिभागियों को वित्तीय बाजार के व्यावहारिक पहलुओं, निवेश के नए विकल्पों और आधुनिक निवेश रणनीतियों को समझने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य में पूंजी बाजार की कार्यप्रणाली, निवेश पोर्टफोलियो प्रबंधन और जोखिम प्रबंधन की समझ पेशेवरों के लिए विशेष महत्व रखती है।
– आयोजन में इनका रहा योगदान
सम्मेलन के सफल आयोजन में समन्वयकों विशाल मेनारिया, रौनक जैन, प्रकाश प्रजापत, रौनक शुक्ला, हितेश गोस्वामी, दामिनी कासट, मधु चंडालिया, रोहिणी अवचार, नरेश सुथार, शुभम भोलावत, अभिषेक दानी, शुभम जैन, दीपक श्रीमाली, हिमांशु लोढ़ा, राहुल सेठिया, दीपक पटेल, दीक्षा जारोली, भूमिजा सामदानी, रिद्धि जैन एवं भीतिक सेठिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आईसीएआई उदयपुर शाखा की प्रबंध समिति के सदस्य सौरभ गोलछा, राहुल माहेश्वरी, कपिल जोशी, धर्मेंद्र कोठारी एवं अरुणा गेल्डा ने भी आयोजन के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई। अंत में शाखा सचिव अरुणा गेल्डा ने अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, प्रायोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस : पूंजी बाजार, स्मॉल-कैप निवेश और संपत्ति निर्माण के अवसरों पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
