उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, संयम, सदाचार और आत्मकल्याण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध बनाकर आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ना है।
साध्वीश्री ने कहा कि धर्म का पालन तभी सार्थक होता है, जब उसे जीवन के व्यवहार में उतारा जाए। संयम व्यक्ति को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सिखाता है, जबकि सदाचार जीवन में शांति, सरलता और सकारात्मकता का संचार करता है। मनुष्य को अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में पवित्रता बनाए रखते हुए अहिंसा, करुणा और क्षमा जैसे गुणों को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तप, त्याग और साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों को दूर कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। सांसारिक आकर्षणों के बीच आत्मचिंतन और धार्मिक आराधना के लिए समय निकालना आवश्यक है।
धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वीश्री के प्रवचनों का लाभ लिया। कार्यक्रम में धर्म, आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया।
साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने दिया धर्म, संयम और सदाचार का संदेश
