उदयपुर। महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि सुख प्राप्त करने का एकमात्र उपाय यही है कि आप किसी को दुःख मत दीजिए और सदा दूसरों के लिए सुख की कामना कीजिए। उन्होंने कहा कि मानव मन की प्रवृत्ति अक्सर इसके विपरीत होती है; व्यक्ति दूसरों को दुःखी और केवल स्वयं को सुखी देखना चाहता है। जैसे बादल दूसरे के घरों में बरसते हैं, तभी वे अपने आँगन में भी बरसते हैं और जब बाजार में ग्राहक आते हैं, तभी हर दुकान पर रौनक आती है। जैसा बीज हम बोते हैं, वैसा ही फल पाते हैंकृबबूल बोकर कभी अंगूर की प्राप्ति नहीं हो सकती। यदि हम पेंसिल बनकर किसी के जीवन में सुख लिख सकें तो श्रेष्ठ है, पर कम से कम रबर बनकर किसी के सुख को मिटाने का प्रयास न करें।
धर्मसभा में प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने भगवान महावीर के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन एक-दूसरे के काम आने और सहयोग करने के लिए है। संसार की रीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि दुःख में दुनिया मुँह मोड़ लेती हैकृचलती बारात में दूल्हा पीछे और बाराती आगे मस्ती में चलते हैं, जबकि शवयात्रा में शव आगे और लोग पीछे रहते हैं। यदि घर, परिवार और समाज में सभी एक-दूसरे के सहयोगी बनें, तो परिणाम स्वतः सुखद होंगे। किसी गिरते हुए व्यक्ति को धक्का देने के बजाय हाथ पकड़कर आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए तथा जीवन में मैत्री, करुणा, माध्यस्थ और प्रमोद भाव को स्थान देना चाहिए।
सभा के दौरान उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि द्वारा शुभ भाव संप्रेषित किए गए। इस अवसर पर सामूहिक भक्तामर पाठ एवं एकासन व्रत के माध्यम से प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की महत्ता पर प्रकाश डाला गया तथा माता मरुदेवी को नमन किया गया। कार्यक्रम के समापन पर महामंत्री हिम्मत जी बडाला द्वारा सभी अतिथियों का सत्कार कर धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
सुख-दुःख झूले की तरह आते-जाते हैंःडॉ. राजेन्द्र मुनि
