उदयपुर, 30 सितंबर। देवेंद्र धाम में आयोजित धर्मसभा में जैन संत डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि पुण्य और पाप का कर्ता-धर्ता हमारा मन ही है। इसलिए मनुष्य को अपने विचारों को सदैव पवित्र और सकारात्मक रखने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, मद, मोह और लोभ जैसे अशुभ विचार मन को प्रभावित करें तो सजग होकर उसे शुभ चिंतन की ओर मोड़ना चाहिए। मन ही बंधन और मोक्ष का मूल कारण है। हम शरीर, घर, वस्त्र और वाहनों की स्वच्छता का ध्यान रखते हैं, उसी प्रकार अंतर्मन को भी स्वच्छ रखना जरूरी है।
प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि मनुष्य पुण्य का फल चाहता है, लेकिन सत्कर्म करने से पीछे हटता है। बबूल का बीज बोकर आम की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने भी मंगल भावना व्यक्त की। सभा में सूरत दिल्ली बेलगाम बोईसर मुंबई आदि स्थानों से आए हुए अतिथियों का सम्मान किया गया। महामंत्री हिम्मत बडाला ने 5 अक्टूबर को युवाचार्य महेंद्रऋषि के जन्मोत्सव पर गुणानुवाद सभा की जानकारी दी।
मन की शुद्धता ही पुण्य की राहःडॉ. सुरेंद्र मुनि
